6/06/2014

अहमदिया पर पाकिस्तान को हिदायत

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पाकिस्तान सरकार से अहमदिया समुदाय की हिफ़ाज़त मज़बूत करने की गुज़ारिश की गई है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने ख़ासतौर से कहा है कि पाकिस्तान सरकार को अहमदिया समुदाय के लोगों की हत्याएँ रोकने के लिए ठोस क़दम उठाने होंगे.

विशेषज्ञों ने कहा कि किसी मत या धर्म को मानने वालों को उनकी आस्था की वजह से उनके जीने के अधिकार से महरूम नहीं किया जा सकता.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में हाल ही में अहमदिया समुदाय के लोगों की हत्याएँ करने की घटनाओं के बाद सरकार को उनकी हिफ़ाज़त मज़बूत करने की हिदायत दी गई है.

पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को मुसलमान कहलाने का अधिकार नहीं है और उन्हें अपने मज़हब को प्रचारित करने का भी हक़ नहीं है.

इस्लाम के कुछ बुनियादी उसूलों पर मुख्य धारा के मुसलमानों और अहमदिया समुदाय के बीच कुछ अलग-अलग राय हैं.

मुख्य धारा के मुसलमान पैगम्बर मोहम्मद साहब को आख़िरी रसूल और पैग़म्बर मानते हैं.

जबकि अहमदिया समुदाय के लोगों का मानना है कि पैग़म्बर मोहम्मद साहब आख़िरी रसूल नहीं हैं और उनके बाद जिन इमाम को आना था, वो आ चुके हैं.


संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि 13 मई को पाकिस्तान पुलिस ने अहमदिया समुदाय के चार लोगों को इस्लाम की तौहीन करने के इल्ज़ाम में गिरफ़्तार किया था.

बाद में तीन लोगों को तो रिहा कर दिया गया था. लेकिन जिस एक व्यक्ति को हिरासत में रखा गया था, उसे एक 15 साल के नौजवान ने ही गोली मारकर उसकी हत्या कर दी.

मई महीने में एक अमरीकी डॉक्टर मानवीय सहायता के एक मिशन पर पाकिस्तान के दौर पर थे.

जब वो 26 मई को एक क़ब्रिस्तान में अपने रिश्तेदारों की क़ब्रों को देखने गए तो वहीं पर दो लोगों ने उनकी हत्या कर दी.

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2013 में अहमदिया समुदाय के 17 लोगों की हत्याएँ हुई थीं.

इन विशेषज्ञों ने पाकिस्तान सरकार और अधिकारियों से गुज़ारिश की है कि अहमदिया समुदाय के लोगों की ना सिर्फ़ हिफ़ाज़त मज़बूत की जाए.

बल्कि जो लोग अहमदिया समुदाय के लोगों की हत्याएँ करते हैं, उन्हें भी इंसाफ़ के कटघरे में लाया जाए.

रिपोर्ट प्रस्तुति: महबूब ख़ान