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सुरक्षा


मदद की सख़्त ज़रूरत, मगर धन नहीं है

Brazzaville deported gathered in Maluku camp near border

उन्हें ज़रूरत इतनी मदद की जितनी कभी नहीं रही लेकिन मदद करने वालों के पास संसाधन ही मौजूद नहीं हैं.

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इराक़ में लड़खड़ा रही है ज़िन्दगी

Iraq_Women

इराक़ में हिंसा इतना गम्भीर रूप ले चुकी है कि विशेषण ही कम पड़ने लगे हैं आम लोगों की तकलीफ़ बयान करने के लिए.

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जान पर खेलकर भी, फ़ायदा नहीं

South_East_Children

बांग्लादेश और म्याँमार के 25 हज़ार लोगों को जान पर खेलकर इंडोनेशिया और मलेशिया का रुख़ क्यों करना पड़ा.

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साल भर बाद अब हो रही है घर वापसी

Pakistan_Displaced_children

पाकिस्तान में पिछले साल सेना और चरमपंथियों के बीच लड़ाई में बेघर हुए लोगों की हो रही है घर वापसी.

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पाकिस्तान को मिली बधाई

First Phase Digital

पाकिस्तान को रिकॉर्ड संख्या में और लम्बे समय तक शरणार्थियों को पनाह देने के लिए बधाई मिली है.

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ज़ुल्मो-सितम ने किया उन्हें दर-बदर

displacement

दुनिया भर में लड़ाई-झगड़ों और ज़ुल्मो-सितम ने करोड़ों लोगों को बेघर और दर-बदर कर दिया है. मदद के लाले पड़ रहे हैं.

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पाकिस्तान में तेज़ी से बढ़ती फाँसी

Jail_Cells

पाकिस्तान में इसी साल मार्च में फाँसी पर से रोक हटाए जाने के बाद जैसे लोगों को फाँसी पर लटकाने की होड़ सी लग गई है.

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65 साल की राजनैतिक नाकामी

Palestinians_Gaza

फ़लस्तीन संकट के इतने लम्बा चलने की उम्मीद नहीं की गई थी. लेकिन 65 साल बाद भी हालत नहीं सुधरी.

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आख़िर वो हथियार बनते ही क्यों हैं

weapon-arms

दुनिया भर में यही सवाल पूछा जा रहा है कि आख़िर हथियार बनते ही क्यों हैं जो हर साल पचास हज़ार जानें ले लेते हैं.

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