11/07/2013

मिस्र के हालात पर गहरी चिन्ता

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने मिस्र में उग्र और हिंसक होते जा रहे हालात पर गहरी चिन्ता जताई है.

ग़ौरतलब है कि मुस्लिम ब्रदरहुड के नेतृत्व वाली सरकार को हटाए जाने के बाद मिस्र में भड़की हिंसा में 100 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

तीन जुलाई को शुरू हुए इस राजनीतिक संकट में क़रीब डेढ़ हज़ार लोग घायल भी हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई ने कहा है कि ऐसी किसी भी घटना की तुरन्त और व्यापक जाँच होनी चाहिए जिसमें लोग हताहत होते हैं और इन घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ तुरन्त क़ानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.

हालाँकि नवी पिल्लई ने ये भी कहा कि ऐसी कोई भी जाँच स्वतन्त्र और निष्पक्ष एजेंसियों द्वारा होनी चाहिए और जाँच रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जानी चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता सिसीली पाउल्ली का कहना था, "हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे हिंसा का रास्ता ना अपनाएं. हम प्रदर्शनकारियों से भी अनुरोध करते हैं कि वो अपने प्रदर्शनों को शान्तिपूर्ण रखें."

"हम स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं कि अन्तरिम सरकार ने संविधान के बदलाव के लिए एक पैनल गठित करने और संवैधानिक बदलावों पर जनमतसंग्रह कराने की घोषणा की है. साथ ही हमें ये भी जानकारी है कि इन प्रस्तावों को मुस्लिम ब्रदरहुड ने नामंज़ूर कर दिया है."

उन्होंने कहा कि हम सभी पक्षों से रचनात्मक बातचीत में हिस्सा लेने का अनुरोध करते हैं और ये भी, कि वो देश को शान्तूपूर्ण तरीक़े से आगे ले जाने की प्रक्रिया में शामिल हों.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई ने मिस्र की सेना और क़ानून लागू करने वाली एजेंसियों का भी आहवान किया कि वो प्रदर्शनकारियों के साथ संयम और सहिष्णुता दिखाएँ और ये भी सुनिश्चित करें कि पुलिसिंग के अन्तरराष्ट्रीय मानकों और मानवाधिकार मानकों का भी पालन होता रहे.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी मिस्र में हुई मौतों पर गहरी चिन्ता जताई. उन्होंने सभी पक्षों से आग्रह किया कि वो संयम से काम लें और स्थिति को और ज़्यादा ना बिगड़ने दें.

महासचिव ने सभी पक्षों से देश को शान्तिपूर्ण तरीक़े से आगे ले जाने वाले रास्ते पर चलने का आग्रह किया.