11/07/2013

असमानता से अपराध और बीमारियाँ पनपते हैं

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि सभी इन्सानों के लिए एक टिकाऊ दुनिया बनाने के वास्ते सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में असमानता पर एक विचार गोष्ठि में महासचिव ने कहा कि जिन समाजों में आशा और अवसरों की कमी हो जाती है वो समाज संघर्ष और अस्थिरता के लिए एक नाज़ुक माहौल बन जाते हैं.

बान की मून ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक ग़ैर-बराबरी सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर सकती है. असामानताओं से सामाजिक भाईचारा भी कम होता है और किसी भी तरह की असमानताएँ पूरे राष्ट्र के विकास में भी रोड़ा अटका सकती हैं.

बान की मून का कहना था, "असमानता से अपराध और बीमारियाँ जन्म ले सकते हैं, साथ ही पर्यावरण को भी भारी नुक़सान पहुँच सकता है जिससे आर्थिक विकास के रास्ते में भी बाधा खड़ी हो सकती है."

उन्होंने कहा, "अगर किसी भी समाज में असामानताएँ कम होने के बजाय बढ़ती ही रहें तो वहाँ होने वाला विकास टिकाऊ नहीं हो सकता है. इसीलिए 2015 के बाद के विकास लक्ष्यों के एजेंडा के लिए होने वाले विचार विमर्श में समानता एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभर रहा है. असमानता को कम करना है तो उसके लिए बड़े बदलाव लाने होंगे."

बान की मून ने कहा, "आर्थिक और वित्तीय संकटों का हल निकालना होगा जिनसे सभी का भला हो सके. ऐसा रास्ता निकालना होगा जिसके ज़रिए टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने में सभी की भागीदारी हो."

महासचिव बान की मून ने घरों, व्यवसायों और सत्ता के गलियारों में महिलाओं को सशक्त बनाने की ज़रूरत पर ध्यान खींचते हुए कहा कि महिलाओं और पुरुषों के बीच व्यापक असमानता भी ग़रीबी की एक बड़ी वजह है.

उन्होंने कहा कि असमानता और ग़रीबी को ख़त्म करते हुए सुख-समृद्धि में सभी की भागीदारी सुनिश्चित करना संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास एजेंडा का मुख्य पहलू होना चाहिए.

महासचिव बान की मून ने आहवान किया कि आइए हम सभी के लिए अवसरों की बराबरी सुनिश्चित करने के लिए एक साथ मिलकर काम करें.