6/07/2013

मिस्र में सैनिक हस्तक्षेप लोकतान्त्रिक सिद्धान्तों के ख़िलाफ़

सुनिए /

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने मिस्र में शान्ति, अहिंसा, बातचीत जारी रखने और संयम बरतने की अपील दोहराते हुए कहा है कि देश में मौजूदा तनाव और अनिश्चितता को देखते हुए इनकी बहुत ज़रूरत है.

डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन में गुरूवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए बान की मून ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र हालात पर नज़र रखे हुए है. साथ ही मिस्र में तेज़ी से बदलते हुए घटनाक्रम पर चिन्ता भी बरक़रार है.

उन्होंने कहा कि मिस्र में बहुत से नागरिकों ने अपने विरोध प्रदर्शनों में अपना ग़ुस्सा, निराशा और जायज़ चिन्ताएँ व्यक्ति किए हैं लेकिन इसके साथ हमें ये भी ध्यान रखना होगा कि किसी भी देश के राजनीतिक मामलों में सेना का हस्तक्षेप एक गम्भीर चिन्ता का मामला है.

बान की मून ने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ लोकतन्त्र के बुनियादी सिद्धान्तों के अनुरूप नहीं है. बान की मून ने कहा कि इसलिए लोकतन्त्र के सिद्धान्तों के अनुरूप जितनी जल्दी नागरिक शासन फिर से बहाल कर दिया जाए, हालात के लिए उतना ही अच्छा होगा.

बान की मून ने कहा, “सारी दुनिया की नज़रें इस पर लगी हैं कि मिस्र में आगे क्या होने वाला है. साथ ही ये उम्मीद भी बरक़रार है कि मिस्र के नागरिकों की गतिविधियाँ शान्तिपूर्ण होंगी और वो अपने सामने दरपेश समस्याओं और मुश्किलों से जल्द ही उबर पाएंगे.”

उन्होंने ये भी उम्मीद जताई कि जिस मक़सद के लिए मिस्र के नागरिकों ने इतनी हिम्मत दिखाई है, बदलाव के उस मक़सद की तरफ़ मज़बूती से बढ़ते रहेंगे और एक आम सहमति बन सकेगी.”

महासचिव ने ज़ोर देकर कहा कि मिस्र के सभी नागरिकों की ज़रूरतों और चिन्ताओं को समझने के लिए ज़रूरी है कि राजनीतिक प्रक्रिया में सभी को शामिल करने का रास्ता अपनाया जाए. साथ ही मूल भूत नागरिक अधिकारों, विचार व्यक्त करने की आज़ादी और किसी जगह इकट्ठा होने के अधिकारों को सुनिश्चित करना बहुत अहम है.

उन्होंने कहा है कि मौजूदा संकट का हल निकालने के लिए ज़रूरी है कि सभी को साथ लेकर चला जाए. राजनीतिक प्रक्रिया में जो भी विचार विमर्श हों, उसमें और शासन चलाने वाली संस्थाओं को देश की राजनीति में सक्रिय प्रतिनिधियों को ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में शामिल किया जाए.