पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियाँ ग़ैरक़ानूनी
संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि फ़लस्तीनी क्षेत्र – पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियाँ अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत ग़ैर-क़ानूनी हैं.
महासचिव के प्रवक्ता के कार्यालय से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि इसराइल ने पश्चिमी तट के ई-1 क्षेत्र में यहूदी बस्तियाँ बनाने की जो घोषणा की है, उस पर महासचिव ने गहरी चिंता जताई है.
उन्होंने आहवान किया कि इस तरह की यहूदी बस्तियाँ बनाने के फ़ैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए.
महासचिव के वक्तव्य में कहा गया है कि क्षेत्र के लिए इस मुश्किल दौर में सभी पक्षों को संयम से काम लेना चाहिए और सार्थक शांति वार्ता के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए.
महासचिव के वक्तव्य में कहा गया कि शांति प्रक्रिया फिलहाल ख़तरे में नज़र आ रही है जिसे फिर से पटरी पर लाने के लिए अथक प्रयासों की ज़रूरत है.
‘श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश को हटाना, विधि शासन को बड़ा झटका’
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त नवी पिल्लई ने कहा कि श्रीलंका में मुख्य न्यायाधीश शिरानी भंडारनायके पर महाभियोग चलाया जाना और उन्हें पद से हटाया जाना देश में विधि के शासन के लिए एक और गंभीर झटका है.
नवी पिल्लई ने शुक्रवार को कहा कि मुख्य न्यायाधीश को इस तरह हटाए जाने से देश में जवाबदेही और सुलह-सफ़ाई के प्रयासों को नुक़सान पहुँच सकता है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय का कहना है कि मुख्य न्यायाधीश शिरानी भंडारनायके को मंगलवार को उनकी बर्ख़ास्तगी का नोटिस देते हुए उनके कार्यालय और सरकारी निवास से से बाहर निकाल दिया गया था.
नवी पिल्लई ने कहा कि हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुख्य न्यायाधीश को हटाने की संसदीय तरीक़े से संविधान का उल्लंघन हुआ है, इसके बावजूद शिरानी भंडारनायके को मुख्य न्यायाधीश पद से हटा दिया गया.
मानवाधिकार आयुक्त ने इस घटनाक्रम को श्रीलंका में न्यायपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप और विधि के शासन को भारी झटका क़रार दिया.
उन्होंने कहा कि श्रीलंका में सत्ता दुरुपयोग का लंबा इतिहास रहा है और इस ताज़ा घटनाक्रम से भी शक्ति संतुलन के बुनियादी सिद्धांत को व्यापक नुक़सान पहुँचा है.
खसरा – चेचक अब भी एक बड़ी चुनौती
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि हालाँकि खसरा से होने वाली मौतों की संख्या में पिछले एक दशक में ख़ासी कमी आई है लेकिन खसरा अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
ताज़ा आँकड़ों से पता चलता है कि ख़सरा से होने वाली मौतों में वर्ष 2000 और 2011 के बीच 71 प्रतिशत कमी आई है.
इस अवधि में नए मामलों में भी 60 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. ख़सरा से ख़ासतौर पर बच्चों की मौतें ज़्यादा होती हैं. एजेंसी का कहना है कि वर्ष 2015 तक ख़सरा को जड़ से मिटाने के लिए बच्चों को ख़सरा की दवाई की दो ख़ुराक़ दिया जाना ज़रूरी है.
हालाँकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि वर्ष 2011 में लगभग दो करोड़ बच्चों को ख़सराई की दवाई की पहली ख़ुराक़ भी नहीं मिली.
संगठन के डॉक्टर रॉबर्ट पैरी का कहना है कि बच्चों को दवाई नहीं मिलने के अनेक कारण हैं, "हम जानते हैं कि कुछ लोग बच्चों को ख़सरा की दवाई पिलाने में झिझकते हैं या फिर लापरवाही भी देखने को मिलती है.”
“बहुत से देशों में ऐसी भी जनसंख्या है जिन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था की सुविधाएँ नहीं मिलती हैं और उन्हें नियमित ख़ुराक़ नहीं पिलाई जाती. अनेक देश ऐसे भी हैं जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं के पास संसाधन नहीं है या फिर देश में अस्थिरता है. "
विश्व स्वास्थ्य संगठन का ये भी कहना है कि वर्ष 2011 में जो बच्चे ख़सरा उन्मूलन की दवाई की ख़ुराक से वंचित रह गए उनमें आधे से ज़्यादा कांगो गणराज्य, इथियोपिया, भारत, नाईजीरिया और पाकिस्तान में रहते हैं.
आतंकवाद को हराने के लिए ठोस रणनीति की ज़रूरत
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कहा है कि आतंकवाद को एक ठोस और टिकाऊ रणनीति के ज़रिए ही हराया जा सकता है और इन उपायों में हिंसक संकट और मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसी स्थितियों को हल करना भी ज़रूरी है जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं.
आतंकवाद के मुद्दे पर हुई बहस में लगभग 50 देशों के सदस्यों ने हिस्सा लिया जिसके बाद जारी वक्तव्य में ये बात कही गई है.
सुरक्षा परिषद ने चिंता जताते हुए कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर ख़तरा है.
परिषद के अनुसार कोई भी आतंकवादी गतिविधि आपराधिक होती है चाहे उसके पीछे कारण कुछ भी रहे हों, उसे न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता.
सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष पाकिस्तानी राजदूत मसूद ख़ान ने सदस्य देशों के विचारों का सार पेश करते हुए कहा, "आतंकवाद की निंदा एक सुर में हुई है और इसका सामना करने और इसे ख़त्म करने के लिए दृढ़ और स्पष्ट संकल्प नज़र आया है. आतंकवाद के ख़िलाफ़ असरदार उपाय करने के लिए एक व्यापक रणनीति की अहमियत बार-बार उभर कर सामने आई है."
सुरक्षा परिषद ने ज़ोर देकर कहा कि आतंकवाद का मुक़ाबला करने के लिए तमाम देशों और अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों का सक्रिय सहयोग ज़रूरी है जिसके ज़रिए आतंकवाद के ख़तरे को अलग-थलग करके उसे जड़ से समाप्त किया जा सके.
सुरक्षा परिषद ने ये भी स्वीकार किया कि आतंकवाद को सिर्फ़ सैनिक शक्ति, सुरक्षा बलों, कड़े क़ानून या फिर गुप्त अभियानों से नहीं समाप्त किया जा सकता, बल्कि उन परिस्थितियों पर ध्यान देने की बात कही गई जिनमें आतंकवाद को पनपने का मौक़ा मिलता है.
अक्षय ऊर्जा की पूर्ण क्षमता का प्रयोग करने का आहवान
अक्षय ऊर्जा यानी Renewable Energy की पूर्ण क्षमता को सामने लाने का आहवान किया गया है.
यूनेस्को की महानिदेशक इरीना बोकोवा ने संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी में छठे विश्व भविष्य ऊर्जा सम्मेलन में कहा, "अक्षय ऊर्जा की पूर्ण क्षमता का शोधन करने के लिए एक सम्पूर्ण और व्यावक रणनीति की ज़रूरत है जिसमें बड़े पैमाने पर मानव संसाधन विकसित किए जा सकें, संस्थानात्मक क्षमता बनाई जा सके और स्थानीय स्तर पर कोशिशों को सराहा और बढ़ावा दिया जा सके.”
“इनमें अलग-अलग जगहों के लिए अनुकूल वैज्ञानिक तकनीक और ज्ञान को बढ़ावा देना भी शामिल है जो स्थानीय ज़रूरतों को भी पूरा कर सकें."
इरीना बोकोवा का कहना था कि ये सब एक सटीक पर्यावरण नीति के ज़रिए संभव हो सकेगा.
उन्होंने ये भी कहा कि इस लक्ष्य को आधार बनाकर हर देश में राष्ट्रीय नीति बनाई जाए जिससे वहाँ की पूर्ण क्षमता का शोधन किया जा सके.
इरीना बोकोवा के अनुसार सभी को मिलकर वैश्विक स्तर पर काम करना होगा लेकिन नीतियाँ बनाते समय स्थानीय ज़रूरतों और स्थानीय क्षमताओं का भी ध्यान रखना होगा.
आधी आबादी सिर्फ़ चावल पर निर्भर
दुनिया भर की लगभग आधी आबादी सिर्फ़ चावल के सहारे ज़िंदगी गुज़ार रही है. उबले हुए चावल, भाप लगे चावल या तले हुए चावल, यानी चावल जब खाने का एक हिस्सा हो तो ठीक है, मगर जब पूरा खाना ही सिर्फ़ चावल पर केंद्रित हो जाए तो समस्या गंभीर भी हो सकती है.
दक्षिण पूर्व एशिया में चावल लोगों के भोजन का केंद्रीय हिस्सा है जिस तरह कि दक्षिण भारत में हर व्यंजन में चावल का बड़े पैमाने पर प्रयोग होता है.
लाओस गणतंत्र में भोजन का मतलब ही चावल होता है और 80 प्रतिशत कैलोरीज़ चावल से ही मिलती है. मगर बच्चों के लिए चावल भरपूर भोजन नहीं माना जाता है.
लाओस में चावल ज़्यादा खाने की वजह से बच्चों में कुपोषण बढ़ गया है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने लाओस गणराज्य में इस स्थिति का सामना करने के लिए एक विशेष परियोजना शुरू की है.
पर्यावरण आपदा पुरस्कार के लिए नामांकन
पर्यावरण क्षेत्र में आपदाओं को रोकने या उनका रुख़ बदलने के बारे में किए गए उपायों या गतिविधियों को सम्मानित करने वाले पुरस्कार – द ग्रीन स्टार्ट अवॉर्ड के लिए नामांकन शुरू हो गए हैं जो 15 मार्च तक जारी रहेंगे.
द ग्रीन स्टार्ट अवॉर्ड संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के कार्यालय OCHA, ग्रीन क्रॉस इंटरनेशनल और संयुक्त राषट्र पर्यावरण कार्यक्रम का संयुक्त प्रयास है.
ग्रीन क्रॉस इंटरनेशनल के पॉल गैरवुड का इस पुरस्कार के बारे में कहना था, "कोई भी ऐसा व्यक्ति या संस्था या संगठन इस पुरस्कार का हक़दार हो सकता है जिसने प्राकृतिक आपदा का मुक़ाबला करने, उसे रोकने या फिर लोगों पर उसका नुक़सान कम करने के लिए कारगर काम किया हो.”
ये पुरस्कार 2009 में शुरू हुआ था और इस वर्ष तीसरे पुरस्कार के लिए प्रविष्टियाँ खोली गई हैं.

