28/06/2013

वियेना घोषणापत्र के 20 साल पूरे, मगर बहुत काम अभी बाक़ी

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई ने कहा कि मानवाधिकारों के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ वजूद में आने के बीस वर्ष बाद भी इस क्षेत्र में अभी बहुत काम किए जाने की ज़रूरत है.

नवी पिल्लईध्यान देने की बात है कि वर्ष 1993 में वियेना घोषणा-पत्र और कार्रवाई कार्यक्रम (VDPA) वजूद में आया था.

इसके बीस वर्ष पूरे होने के अवसर पर गुरूवार को वियेना में एक सम्मेलन आयोजित किया गया.

इसे सम्बोधित करते हुए नवी पिल्लई ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में मानवाधिकारों के लिए ये सबसे ज़्यादा असरदार दस्तावेज़ साबित हुआ है.

ग़ौरतलब है कि मानवाधाकारों के सार्वभौमिक घोषणा पत्र को वियेना घोषणा पत्र के नाम से भी जाना जाता है.

नवी पिल्लई ने कहा कि बीस वर्ष पहले वजूद में आए इस दस्तावेज़ ने ये सिद्धान्त मज़बूती से स्थापित किया है कि मानवाधिकार वैश्विक हैं, इन्हें नज़रअन्दाज़ नहीं किया जा सकता और सारी दुनिया में मानवाधिकार अविभाजित और एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.

नवी पिल्लई ने कहा, "लेकिन हमें ये भी समझना और स्वीकार करना होगा कि बहुत से क्षेत्रों में हम उस दस्तावेज़ में बताई गई ज़रूरतों के अनुसार काम नहीं कर सके हैं.”

“वियेना घोषणा पत्र के शुरू में ही ये प्रेरणाजनक वादा किया गया है कि – सभी इंसान एक जैसे ही पैदा होते हैं इसलिए वो सम्मान और अधिकारों के मामले में बराबर हैं. और इंसानों के इन मूलभूत अधिकारों का इसी तरह से सम्मान किया जाएगा. लेकिन दुनिया के बहुत से लोगों के लिए ये समानता और सम्मान अभी सपना भर ही हैं."

ध्यान देने की बात है कि बीस साल पहले ही संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त का दफ़्तर बनाया गया था और इस दफ़्तर की बीसवीं वर्षगाँठ इसी वर्ष सितम्बर में मनाई जाएगी.