21/06/2013

परिवार को संजोए रखने के लिए एक लम्हे की दरकार

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20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस मनाया गया जिसे परिवार के नाम किया गया और परिवार को संजोए रखने पर ज़ोर दिया गया.

ख़ालिद हुसैनी अफ़ग़ान शरणार्थियों से बातचीत करते हुए

ख़ालिद हुसैनी ख़ुद भी एक शरणार्थी रहे हैं

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यानी यूएनएचसीआर ने इस दिवस के अवसर पर 'एक परिवार' अभियान शुरू किया.

इस अभियान का उद्देश्य उन परिवारों के दुख-दर्द को सामने लाना है जो युद्ध और हिंसक लड़ाई की वजह से बिखर गए हैं और अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के एक पूर्व शरणार्थी ख़ालिद हुसैनी यूएनएचसीआर के एक सदभावना दूत यानी गुडविल एम्बेसेडर हैं.

ग़ौरतलब है कि ख़ालिद हुसैनी अन्तरराष्ट्रीय ख्याति के उपन्यास द काइट रनर के लेखक भी हैं. ख़ालिद हुसैनी ने एक परिवार अभियान के लिए सार्वजनिक सन्देश भी रिकॉर्ड किए हैं.

ख़ालिद हुसैनी की आवाज़ में रिकॉर्ड कराया गया एक ऐसा ही सन्देश कहता है, "एक लम्हे में किसी परिवार का सबकुछ खो जाता है, उनका घर, उनके प्रियजन और उनका भविष्य. लेकिन किसी लम्हे में आप किसी बिखरे हुए परिवार के लिए छत मुहैया कराने में मदद कर सकते हैं, उन्हें कुछ आराम और उम्मीद वापिस लौटा सकते हैं."

"ये एक लम्हा निकालकर आप किसी एक परिवार की मदद करने के लिए यूएनएचसीआर के हाथ मज़बूत करें. इसके लिए यूएनएचसीआर की वेबसाइट www.unhcr.org/1 family पर जाए."

यूएनएचसीआर के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में चार करोड़ से ज़्यादा शरणार्थी ऐसे हैं जो अपने ही देशों में अपने घर छोड़कर विस्थापित होने को मजबूर हैं.

इनमें से लगभग साढ़े तीन करोड़ को यूएनएचसीआर जीवन रक्षक सहायता मुहैया करा रही है.