21/06/2013

शान्ति सेना में चीन का बड़ा योगदान

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने शान्ति सैनिकों के सामने दरपेश तीन मुख्य चुनौतियाँ गिनाते हुए शान्ति सेना में सबसे ज़्यादा सैनिक मुहैया कराने के लिए चीन का आभार व्यक्त किया है.

Ban Ki Moon in Chinaचीन की राजधानी बेजिंग में शान्ति सेना प्रशिक्षण केन्द्र में बुधवार को महासचिव ने कहा कि पहली चुनौती ये है कि जटिल राजनीतिक प्रक्रियाओं को समर्थन दिया जाए और ख़तरनाक माहौल में रहने को मजबूर आम नागरिकों की हिफ़ाज़त की जाए.

उन्होंने कहा कि हालाँकि ये चुनौतियाँ नई नहीं हैं लेकिन ये ज़्यादा गम्भीर अवश्य हो गई हैं.

महासचिव बान की मून ने कहा कि वैसे तो संयुक्त राष्ट्र के मिशन को उग्रवाद निरोधक ज़िम्मेदारी नहीं मिली हुई है फिर भी इतना अवश्य कहा जा सकता है कि आत्मघाती बम हमले, अत्याधुनिक विस्फोटक उपकरणों यानी आई ई डी का इस्तेमाल और अन्य अनौपचारिक युद्ध तरीक़ों के प्रयोग से सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा होता है.

महासचिव बान की मून ने दूसरी बड़ी चुनौती की तरफ़ ध्यान दिलाते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र शान्ति सैनिकों को अत्याधुनिक और समुचित प्रशिक्षण दिया जाना ज़रूरी है ताकि वो नए ख़तरों का भली-भाँति सामना कर सकें.

साथ ही ये भी सीख सकें कि लगातार कठिन होते जा रहे हालात में शान्ति स्थापना का काम कैसे किया जाए.

बान की मून ने कहा, "हमें इंजीनियरिंग यूनिट और चलते-फिरते अस्पतालों के लिए कुछ ख़ास क़िस्म की योग्यता और क्षमता वाले लोगों की ज़रूरत है. इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहायता के लिए हम चीन के बड़े शुक्रगुज़ार हैं. ख़ासतौर से माली में संयुक्त राष्ट्र के हालिया अभियान में चीन का योगदान बेहद सराहनीय है.”

"हमें किसी चुनौती का सामना करने के लिए जल्दी से कार्रवाई करने की क्षमता भी अपने शान्ति सैनिकों में बढ़ानी होगी. साथ ही शान्ति सैनिकों में तेज़ी से सूचना और जानकारी एकत्र करने और उसका विश्लेषण करके फ़ैसले लेने की योग्यता और क्षमता भी होनी चाहिए."

महासचिव ने शान्ति स्थापना के लिए तीसरी चुनौती ये बताई कि जहाँ भी ऐसे अभियान चलाने का फ़ैसला किया जाता है उन्हें लगातार समर्थन और सहायता दिया जाना भी बहुत ज़रूरी है.

उन्होंने कहा कि शान्ति अभियानों की सफलता के लिए ज़रूरी है कि उन्हें सुरक्षा परिषद का लगातार राजनीतिक और अन्य तरह का समर्थन और सहयोग मिलता रहना चाहिए.

इसमें शान्ति सेना के लिए सैनिकों और राजनीतिक कर्मियों का योगदान और धन वग़ैरा का योगदान बहुत अहम है. ध्यान देने की बात है कि सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्यों में चीन ही सबसे ज़्यादा शान्ति सैनिक मुहैया कराता है.

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