15/06/2013

भारत 2028 में चीन को पछाड़ देगा

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वर्ष 2028 में भारत चीन को एक विशेष मैदान में पछाड़ देगा और दुनिया में पहला स्थान ले लेगा मगर वो स्थान सैन्य या क्षेत्रीय शक्ति का नहीं बल्कि सबसे ज़्यादा जनसंख्या वाले देश का होगा.

संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2028 के बाद भारत की जनसंख्या चीन से ज़्यादा हो जाएगी जिसके बाद भारत दुनिया का सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा.

इस समय कुल जनसंख्या सात अरब बीस करोड़ है

वर्ष 2028 तक भारत और चीन की आबादी एक अरब 45 करोड़ के आंकड़े पर पहुँचकर बराबर हो जाएगी. उसके बाद भारत की आबादी तो कई दशकों तक बढ़ती रहेगी और एक अरब 60 करोड़ पर पहुँच जाएगी. फिर भारत की जनसंख्या वृद्धि दर में कुछ कमी आएगी जो इस सदी के अन्त तक डेढ़ अरब यानी एक अरब पचास करोड़ पर आ जाएगी.

दूसरी तरफ़ चीन की जनसंख्या वृद्धि दर वर्ष 2028 के बाद ना सिर्फ़ स्थिर होगी बल्कि उसमें 2030 के बाद कमी होगी जो इस सदी के अन्त तक कम होकर एक अरब 10 करोड़ के आसपास पहुँच जाएगी.

World Population Prospects: The 2012 Revision यानी विश्व जनसंख्या संभावनाएँ नामक संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में विश्व की मौजूदा जनसंख्या में वर्ष 2025 तक क़रीब एक अरब की वृद्धि होने का अनुमान जताया गया है.

इस समय दुनिया की आबादी क़रीब सात अरब बीस करोड़ है. इस सदी का आधा सफ़र पूरा होने तक यानी वर्ष 2050 तक विश्व की आबादी लगभग नौ अरब 60 करोड़ हो जाएगी.

जनसंख्या वृद्धि मुख्यतः विकासशील देशों में होगी. अब से लेकर वर्ष 2050 तक का अनुमान देखें तो अफ्रीकी देशों के अलावा ज़्यादा आबादी वाले देशों में भी जनसंख्या वृद्धि होगी जिनमें भारत, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, फिलीपीन्स और अमरीका जैसे देश शामिल हैं.

संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के अपर महासचिव वू होंगबू का कहना है कि हालाँकि पूरी दुनिया में तो आमतौर पर जनसंख्या वृद्धि दर धीमी हुई है लेकिन ये रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि अफ्रीका जैसे कुछ विकासशील देशों में जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही है.

जनसंख्या की यह बढ़ोत्तरी मुख्यतः विकासशील देशों में होने की संभावना है. इसमें आधी से ज़्यादा जनसंख्या अफ्रीकी देशों की होगी. लेकिन विश्व की जनसंख्या का जन्म दर से सीधा संबंध होने के कारण यह जनसंख्या घट भी सकती है.

अनुमान है कि इस सदी के अंत तक विश्व की जनसंख्या या तो बढ़ कर सोलह अरब साठ करोड़ हो जाएगी या फिर घट कर छह अरब अस्सी करोड़ रह जाएगी.

अफ्रीका से हटकर देखें तो बाक़ी दुनिया में अब से लेकर इस सदी के अन्त तक जनसंख्या में औसतन दस प्रतिशत की दर से वृद्धि होगी. जबकि यूरोप में जनसंख्या में 14 प्रतिशत की कमी होगी.

लगभग सभी यूरोपीय देशों में जन्म दर इतनी कम रह गई है कि एक पीढ़ी की जगह लेने के लिए दूसरी पीढ़ी पर्याप्त संख्या में तैयार नहीं हो रही है.

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