15/06/2013

सीरिया हिंसा में 93 हज़ार मौतें

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संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि सीरिया में मार्च 2011 में शुरू हुए मौजूदा हिंसक संघर्ष में अब तक 93 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

रिपोर्ट के अनुसार मृतकों में क़रीब 80 प्रतिशत तो पुरुष ही हैं लेकिन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने ऐसे आंकड़े भी एकत्र किए हैं जिनके अनुसार 8 हज़ार 200 से ज़्यादा बच्चों की मौत का पता चला है.

एक सीरियाई बच्चा और माँ

सीरियाई हिंसा में हज़ारों बच्चों की मौत हो गई है

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई का कहना है कि सीरिया में रोज़ाना मारे जा रहे लोगों की संख्या बहुत चिन्ताजनक है और पिछले वर्ष जुलाई के बाद से औसतन पाँच हज़ार लोग रोज़ाना मारे जा रहे हैं.

नवी पिल्लई ने कहा कि मारे गए लोगों की ये संख्या कम से कम दर्ज की गई है. असल में ये संख्या कहीं ज़्यादा हो सकती है क्योंकि अनेक इलाक़ों में लोगों की मौत का पता लगाना भी मुश्किल साबित हो रहा है.

उन्होंने कहा कि ऐसे ठोस सबूत मिले हैं कि बच्चों को प्रताड़ित करके मार दिया जाता है और अक्सर पूरे परिवारों को ही मौत के घाट उतार दिया जाता है जिनमें छोटे-छोटे बच्चे भी होते हैं.

नवी पिल्लई का कहना था कि सीरिया के इस ख़ूनी संकट का जल्द से जल्द राजनीतिक समाधान निकाला जाना बेहद ज़रूरी है, "सीरिया की सरकारी सेनाएँ शहरी इलाक़ों में दिन रात हवाई हमले कर रही हैं और बम बरसा रही हैं. इन हमलों में सामरिक मिसाइलों और क्लस्टर बमों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.”

नवी पिल्लई ने कहा कि विपक्षी सेनाओं ने भी रिहायशी इलाक़ों में बमबारी की हैं, हालाँकि विपक्षी सेनाओं के हमले कम ताक़त वाले रहे हैं. राजधानी दमिश्क और अन्य शहरों में बमबारी की वजह से भारी संख्या में लोग हताहत हुए हैं.

उन्होंने कहा, “इससे पहले कि हज़ारों की संख्या में और लोग हताहत हो जाएँ, सभी पक्षों से मेरा ज़ोरदार अनुरोध है कि तुरन्त युद्धविराम घोषित करें. इस विवेकहीन ख़ून-ख़राबे से किसी को भी कुछ भी हासिल नहीं हो रहा है. ऐसे मामलों पर अपना प्रभाव रखने वाले देशों को अपने प्रभाव का तुरन्त इस्तेमाल करके सीरिया संकट को तुरन्त हल करना चाहिए. ऐसा करने से अनगिनत लोगों की ज़िन्दगी को बचाया जा सकता है. सीरिया संकट का कोई भी हल सिर्फ़ बातचीत के ज़रिए ही निकाला जा सकता है."

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लई ने कहा कि बहुत ही दुखद और शर्मनाक सच्चाई ये है कि जो 93 हज़ार लोगों की जानें जा चुकी हैं, उन्हें वापिस नहीं लौटाया जा सकता.

अभी तक राजधानी दमिश्क के ग्रामीण इलाक़ों में सबसे ज़्यादा 17 हज़ार 800 मौतें दर्ज की गई हैं. होम्स में 16 हज़ार 400, अलीप्पो में 11 हज़ार 900 और इदलीब में 10 हज़ार 300 लोगों की मौतें दर्ज की गई हैं.

इस बीच बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष दूत लैला ज़ैरूग़ी ने गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि सीरिया संकट की सबसे भारी क़ीमत बच्चों को चुकानी पड़ रही है.

हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि कुछ सशस्त्र गुटों ने ऐसे हज़ारों बच्चों को भी रिहा कर दिया जिन्हें लड़ाई करने के लिए भर्ती किया गया था.

लैला ज़ैरूग़ी ने कहा कि सीरिया, माली, केन्द्रीय अफ्रीकी गणराज्य, सोमालिया और कोंगो गणराज्य जैसे देशों में बच्चों की स्थिति बहुत ही चिन्ताजनक है.

उन्होंने कहा कि सशस्त्र गुटों द्वारा रिहायशी इलाक़ों में सैन्य ताक़त का अंधाधुंध इस्तेमाल, बमबारी, रॉकेट हमले, बन्दूकों से गोलीबारी, डराने-धमकाने वाले तरीक़े और बच्चों को लड़ाई के लिए भर्ती किया जाना चिन्ताजनक मुद्दे हैं.

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