15/06/2013

एक करोड़ बच्चे घरेलू मज़दूरी में

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अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानी आई एल ओ का कहना है कि दुनिया भर में 18 वर्ष से कम उम्र के क़रीब डेढ़ करोड़ बच्चे घरेलू काम करने को मजबूर हैं.

घरेलू कामकाज करता एक किशोर

घरेलू काम करने वाले बच्चे आत्म निर्भर नहीं बन पाते हैं

उनमें से भी लगभग एक करोड़ तो बाल मज़दूरी करने को मजबूर हैं.

इसका मतलब है कि वो या तो काम करने की उम्र से कम हैं या फिर बहुत ही ख़तरनाक हालात में काम करते हैं, कुछ मामलों में तो उनकी हालत ग़ुलामों जैसी होती है.

बाल मज़दूरी के ख़िलाफ़ विश्व दिवस के अवसर पर आई एल ओ ने कहा है कि बाल मज़दूरी करने को मजबूर बच्चों में से लगभग 65 लाख की उम्र पाँच से 14 वर्ष के बीच है.

बाल मज़दूरी को समाप्त करने के अन्तरराष्ट्रीय कार्यक्रम यानी आई पी ई सी एल की अध्यक्ष कॉन्सटेन्स थॉमस ने कहा कि इन बाल मज़दूरों की ये स्थिति या मजबूरी उनके अधिकारों का गम्भीर उल्लंघन है.

ये कार्यक्रम आई एल ओ का ही एक हिस्सा है.

कॉन्सटेन्स थॉमस ने कहा, "हम जानते हैं कि बाल मज़दूरी के जाल में फँसे बच्चे शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और यौन शोषण के लिए आसान शिकार होते हैं. उन्हें अपने ही परिवारों से अलग कर दिया जाता है.”

उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर इन बच्चों से काम कराया जाता है, वहाँ वो समाज के अन्य लोगों की नज़रों से छुपे रहते हैं. इतना ही नहीं, इन हालात में काम करके वो उन परिवारों या लोगों पर ही पूरी तरह निर्भर हो जाते हैं जहाँ वो बाल मज़दूरी करते हैं.

आई एल ओ की ये रिपोर्ट आहवान करती है कि घरेलू कामकाज में बच्चों से मज़दूरी कराने के चलन को रोकने के लिए राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट और ठोस क़दम उठाने की सख़्त ज़रूरत है.