7/06/2013

माँ के दूध में कितना दम!

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बहुत से बच्चे आगे जाकर भी मोटापे की चपेट में रहते हैं

बहुत से बच्चे आगे जाकर भी मोटापे की चपेट में रहते हैं

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिन्ता जताते हुए कहा है कि ज़्यादातर विकासशील देशों में भारी संख्या में बच्चे और किशोर ज़रूरत से ज़्यादा मोटापे का शिकार होते जा रहे और इस स्वास्थ्य समस्या का मुक़ाबला करने के लिए इन देशों में ठोस नीतियाँ नहीं हैं.

संगठन का कहना है कि पांच साल से कम उम्र वाले क़रीब चार करोड़ तीस लाख बच्चे असामान्य रूप से मोटे और ज़्यादा वज़न वाले हैं. इनमें से लगभग 75 प्रतिशत बच्चे विकासशील देशों में रहते है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का ये भी कहना है कि इस बात के वैज्ञानिक सबूत मौजूद हैं कि जिन बच्चों का बचपन ठीक तरह से पोषण नहीं होता है वे किशोरावस्था में या बड़े होने पर मोटापे का ज़्यादा शिकार होते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के पोषण विभाग के डॉक्टर फ्रांसेस्को ब्रेन्का का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की अच्छी देखभाल करके और शिशुओं को माँ का दूध पिलाने की आदत डालने से कुपोषण और मोटापे की समस्याओं से निपटा जा सकता है.

डॉक्टर फ्रांसेस्को बेन्का कहते हैं, "ये तो हम जानते हैं कि इन हालात में क्या किया जाना चाहिए और क्या किया जा सकता है. लेकिन असल बात उन तक पहुँचने की है जिन्हें मदद और देखभाल की ज़रूरत है. हम शिशु अवस्था से ही पोषण और स्वास्थ्य की अच्छी देखभाल मुहैया कराने की एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था क़ायम करने चाहते हैं जो सबके लिए उपलब्ध हो.”

“जब कोई बच्चा पैदा होकर इस दुनिया में क़दम रखता है तो उसके लिए स्वस्थ खानपान करना बेहद ज़रूरी है. बच्चे को शुरू से ही माँ का दूध पिलाना चाहिए और छह महीने तक तो सिर्फ़ माँ का दूध ही मिले जो दो वर्षों तक मिलते रहना चाहिए. छह महीने तक सिर्फ़ माँ का दूध मिलने से बच्चे में ज़रूरी पोषण व्यवस्था बन जाती है और उसके बाद जो खाना-पीना उसे मिले वो बच्चे के स्वास्थ्य के लिए जाँचा-परखा होना चाहिए.”

उनका कहना था कि ये सिर्फ़ परिवार में सन्तुलित खाना बनाकर और खिलाकर किया जा सकता है. असल बात ये है कि खाना किसी भी तरह से जुटाया जाए, उसका सन्तुलित और पोषक होना बेहद ज़रूरी है."

डॉक्टर ब्रेन्का कहना था कि जो बच्चे बचपन में मोटापे का शिकार हो जाते हैं, बहुत सम्भावना है कि वयस्क होने पर भी वो मोटापे की चपेट में रहें. मोटापे की वजह से डायबटीज़ और इसी तरह की अन्य बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है.

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