7/06/2013

इसराइली पाबन्दी से फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था ठप

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अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानी आई एल ओ ने कहा है कि फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था तब तक नहीं पनप सकती जब तक कि इसराइली प्रतिबन्ध नहीं हटा लिए जाते.

फ़लस्तीनी क्षेत्र

इसराइली क़ब्ज़े से फ़लस्तीनी विकास रुक गया है

आई एल ओ ने इसराइल के क़ब्ज़ा किए हुए फ़लस्तीनी क्षेत्रों की स्थिति के बारे में एक रिपोर्ट तैयार की है जिसमें कहा गया है कि फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था बिल्कुल ठप हो चुकी है, वहाँ बेरोज़गारी, ग़रीबी और खाने-पीने के लिए बाहरी सहायता पर निर्भरता की स्थिति बहुत गम्भीर हो चुकी है.

रिपोर्ट कहती है कि फ़लस्तीनी क्षेत्रों पर इसराइल का दशकों जारी क़ब्ज़ा और फ़लस्तीनी इलाक़ों में यहूदी बस्तियों की मौजूदी से फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था, ख़ासतौर से निजी क्षेत्र का विकास रुक गया है.

फ़लस्तीनी सरकार की तरफ़ से इसराइल सरकार जो टैक्स इकट्ठा करती है, वो रक़म भी फ़लस्तीनियों को नहीं लौटाई जाती, और फ़लस्तीनियों को दानदाता देशों से भी मदद नहीं मिल रही है जिसकी वजह से वहाँ विकास का पहिया थम गया है.

आई एल ओ के महानिदेशक के विशेष सलाहकार कारी तपीयोला का कहना था, “इसराइल को फ़लस्तीनी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और कारोबारों से प्रतिबन्ध ना सिर्फ़ तुरन्त हटा लेने चाहिए बल्कि इन्हें एक साथ हटाना चाहिए ताकि फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था विकास के पहिये पर तेज़ी से चल सके और रोज़गार पैदा कर सके.”

“फ़लस्तीनी क्षेत्रों पर इसराइल के लगातार जारी क़ब्ज़े और वहाँ यहूदी बस्तियों की मौजूदगी से ना सिर्फ़ फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था, ख़ासतौर से निजी क्षेत्र प्रगति नहीं कर पा रहे हैं. इसराइली क़ब्ज़ा और यहूदी बस्तियों की मौजूदगी के रूप में दोहरा बोझ अगर फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था पर यूँ ही पड़ता रहा तो दो क़ौमों के लिए दो राष्ट्र बनाने का सपना और वादा गम्भीर रूप से प्रभावित होगा.”

रिपोर्ट कहती है कि फ़लस्तीन में अभी क़रीब 23 प्रतिशत बेरोज़गारी है. ग़ाज़ा में हालात इससे भी ज़्यादा ख़राब हैं जहाँ तीस प्रतिशत बेरोज़गारी है और महिलाओं की लगभग आधी आबादी बेरोज़गार है.