6/01/2017

अलेप्पो में उम्मीद की नई किरण

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संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा है कि सीरिया के पूर्वी शहर अलेप्पो के पूर्वी इलाक़े में नया साल शुरू होने के साथ ही लोगों में अमन चैन की नई उम्मीद जागी है.

अलेप्पो शहर के लिए संयुक्त राष्ट्र के Acting Resident & Humanitarian Coordinator सज्जाद मलिक ने न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में पत्रकारों से टेलीफ़ोन के ज़रिए बातचीत के दौरान ये जानकारी साझा की.

सज्जाद मलिक की टीम नया साल शुरू होने के बाद से ही अलेप्पो के पूर्वी इलाक़े में ज़मीनी स्थिति का जायज़ा लेते रहे हैं.

उन्होंने बताया कि पूर्वी अलेप्पो में हुई तबाही और बर्बादी के स्तर को शब्दों में बयान करना नामुमकिन है, सिर्फ़ देखकर ही उसकी भीषणता का अहसास और अन्दाज़ा लगाया जा सकता है.

“तमाम बच्चे गलियों और रास्तों में खेलते हुए उम्मीदों और आशाओं से भरे हुए नज़र आते हैं कि अमन चैन अब नामुमकिन नहीं है. और इस बार उन्हें ये उम्मीद भी है कि वो अपनी ज़िन्दगी को फिर से समेटकर उसे संवारने की कोशिश कर सकेंगे.”

स्कूल, अस्पताल, दुकानें, कारोबार और अन्य महत्वपूर्ण संस्थान और ढाँचे बुरी तरह तबाह हो चुके हैं.

हालाँकि उनका ये भी कहना था कि तबाही और बर्बादी के भीषण दौर के बाद लोगों में अमन चैन की नई उम्मीद भी जागी है, “अलेप्पो में हुई तबाही और बर्बादी के स्तर का अन्दाज़ा लगाना भी मुश्किल है मगर मलबे से निकलते बच्चों को तबाह हुई इमारतों की छतों पर खेलते-कूदते देखकर अच्छा लगता है.”

“ये नज़ारा देखकर नई उम्मीद नज़र आती है. क्योंकि बन्दूकें ख़ामोश हो गई हैं और शान्ति का नया दौर शुरू होने की उम्मीद जागी है.”

“तमाम बच्चे गलियों और रास्तों में खेलते हुए उम्मीदों और आशाओं से भरे हुए नज़र आते हैं कि अमन चैन अब नामुमकिन नहीं है. और इस बार उन्हें ये उम्मीद भी है कि वो अपनी ज़िन्दगी को फिर से समेटकर उसे संवारने की कोशिश कर सकेंगे.”

उनका कहना था कि अलेप्पो के पूर्वी इलाक़े को तबाही और बर्बादी के साए से निकालने के लिए बहुत भारी मदद की ज़रूरत है.

संयुक्त राष्ट्र और उसकी साझीदार एजेंसियाँ पूर्वी अलेप्पो की आबादी की मदद करने के लिए दिन-रात जी तोड़ मेहनत कर रही हैं.

इस मदद के तहत दस लाख से भी ज़्यादा लोगों को पीने का साफ़ पानी मुहैया कराया जा रहा है.

क़रीब 13000 गम्भीर रूप से ज़ख़्मियों को पूर्वी अलेप्पो के अस्पतालों में दाख़िल कराया गया है.

साथ ही क़रीब दस हज़ार बच्चों को पोलियो से बचाने की दवा भी पिलाई गई है.

रिपोर्ट प्रस्तुति: महबूब ख़ान

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