4/01/2013

सीरिया संकट, मानव तस्करी और ग़रीबी उन्मूलन

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सीरिया में सोमालिया जैसे हालात बनने की आशंका

सीरिया संकट के लिए संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग के संयुक्त विशेष प्रतिनिधि लख़दर ब्राहमी ने आगाह किया है कि अगर सीरिया संकट का कोई ठोस समाधान नहीं खोजा गया तो वहाँ भी ये संकट ऐसी अराजकता में बदल सकता है जैसाकि सोमालिया में 1991 में हो गया था.

रूस की राजधानी मॉस्को में विदेश मंत्री सरगेई लैवरोफ़ से मुलाक़ात करने के बाद लख़दर ब्राहमी ने कहा, “एक तरफ़ सीरिया सरकार का कहना है कि वो देश के लोगों को आतंकवादी संकट से बचाने की कोशिश कर रही है क्योंकि विदेशी आतंकवादियों ने देश में अस्थिरता पैदा कर दी है. दूसरी तरफ़ कुछ आम लोगों का कहना है कि मौजूदा सरकार ने वैधता खो दी है क्योंकि सिर्फ़ एक ही परिवार पिछले चालीस वर्षों से देश में शासन करता आ रहा है. और अब समय आ गया है कि मौजूदा नेतृत्व सत्ता से हट जाए.”

लख़दर ब्राहमी के अनुसार इस तरह सीरिया में दो अलग-अलग तरह की समस्याओं पर बात की जा रही है.

लख़दर ब्राहमी ने बाद में मिस्र की राजधानी काहिरा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीरिया के संकट को अगर कुछ ही महीनों के भीतर हल नहीं किया गया तो ये स्थिति विश्व शांति के लिए एक सीधा ख़तरा बनी रहेगी.

 सीरिया संकट में साठ हज़ार लोगों की मौत

सीरिया में 15 मार्च 2011 से लेकर 30 नवंबर, 2012 के बीच की अवधि में लगभग 60 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के लिए एक विस्तृत विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों ने ये आंकड़ा जारी किया है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता रूपर्ट कॉलविल का कहना है कि इस सूची में चार मुख्य तत्व शामिल किए गए – मृतकों का शुरूआती और अंतिम नाम, मृत्यु की तारीख़ और स्थान. इनमें से अगर कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं थी तो मृतक का नाम इस सूची में शामिल नहीं किया गया.

रूपर्ट कॉलविल का कहना है कि हालाँकि ये आँकड़ा अपने आप में दिल दहला देने वाला है, लेकिन मृतकों की संख्या इससे भी ज़्यादा हो सकती है.

दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई महिला की मौत पर चिंता

महिलाओं के ख़िलाफ़ हिसा के विरोध में ज़ोरदार आवाज़ उठ रही है

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा किसी भी हालत में स्वीकार, माफ़ या सहन नहीं की जा सकती है.

बान की मून ने भारत की राजधानी दिल्ली में पिछले वर्ष 16 दिसंबर को एक बस में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई एक युवा महिला की मृत्यु के बाद ये बात कही है.

बान की मून ने उस महिला, उसके परिवार और मित्रों के लिए सहानुभूति भी व्यक्त की.

संयुक्त राष्ट्र महिला समानता संगठन की अध्यक्ष मिशेल बेचलेट ने महिला के परिजनों के साथ सहानूभूति व्यक्त करते हुए कहा कि इस युवा महिला की मौत से इस क्षेत्र में समुचित कार्रवाई के लिए सबक लेना चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन की अध्यक्ष नवी पिल्लई ने उम्मीद जताई है कि वर्ष 2013 में भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों में कमी की दिशा में एक नया अध्याय शुरू होगा और महिलाएँ समाज में ख़ुद को ज़्यादा सुरक्षित महसूस करेंगी.

पाकिस्तान में बढ़ती जातीय हिंसा पर चिंता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने पाकिस्तान में बढ़ती जातीय हिंसा पर गहरी चिंता जताई है.

महासचिव के प्रवक्ता के कार्यालय से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि बान की मून ने विशेष रूप से धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा की भर्त्सना की है.

इस हिंसा में हाल ही में दक्षिण – पश्चिमी पाकिस्तान में तीन बसों को कार बम हमलों से निशाना बनाया गया जिनमें कम से कम 20 शिया मुसलमानों की मौत हो गई और 25 घायल हो गए. ये शिया मुसलमान ईरान जा रहे थे.

महासचिव ने उस घटना की भी कड़ी निन्दा की है जिसमें तहरीके – तालिबान – पाकिस्तान ने पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में सरकार समर्थित क़बायली पुलिस के 21 सदस्यों की हत्या कर दी थी.

महासचिव ने कहा है कि इस तरह के हिंसक कृत्य किसी भी कारण या समस्या का बहाना बनाकर सही नहीं ठहराए जा सकते हैं और दोषियों को न्याय के कटघरे में अवश्य लाया जाना चाहिए.

महासचिव बान की मून ने पाकिस्तान के लोगों और सरकार के साथ संयुक्त राष्ट्र की एकजुटता साथ होने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि पाकिस्तान में आतंकवाद का मुक़ाबला करने में सरकारी संस्थाओं और आज़ादी सुनिश्चित करने में संयुक्त राष्ट्र के प्रयास जारी रहेंगे.

इस वर्ष अफ़ग़ानिस्तान की मानवीय तस्वीर ख़ासी धुंधली

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता मामलों के कार्यालय ओसीएचए (OCHA) ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में वर्ष 2013 के दौरान आम लोगों को संरक्षण मुहैया कराना मुख्य लक्ष्य रहेगा.

अफ़ग़ानिस्तान के लिए इस वर्ष की कार्य योजना में ये आकलन पेश किया गया है.

ओसीएचए का कहना है कि पिछले एक दशक के दौरान हालाँकि अफ़ग़ानिस्तान को ख़ासी बड़ी अंतरराष्ट्रीय सहायता दी गई है लेकिन वहाँ फिर भी मानवीय स्थिति बद से बदतर हो रही है.

आकलन में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान मानवीय स्थिति और विकास गति के मामले में संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के मानकों में लगातार सबसे नीचे बना हुआ है.

मानव तस्करी के लिए श्रम शोषण एक प्रमुख कारण – आईओएम

श्रम के लिए मानव तस्करी के ख़िलाफ़ अभियान

विस्थापितों के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन –आईओएम (IOM) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मानव तस्करी का मुख्य कारण कामकाज के लिए लोगों का शोषण किया जाना है.

मानव तस्करी के चलन पर ख़ास ध्यान देने वाली एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2011 में मानव तस्करी के जो मामले ध्यान में लाए गए उनमें से लगभग आधे श्रम शोषण से जुड़े हुए थे.

आई ओ एम के प्रवक्ता जुम्बी उमरी जुम्बी ने कहा कि वर्ष 2011 के दौरान श्रम शोषण के तीन हज़ार से ज़्यादा प्रभावितों को सहायता दी गई,  ”वर्ष 2010 के बाद से तो श्रम के लिए मानव तस्करी ने यौन शोषण के लिए मानव तस्करी को पीछे छोड़ दिया है.”

“वैसे तो ये इस मामले में संगठन की पहली रिपोर्ट है लेकिन फिर भी इसमें दरअसल कोई ख़ास देरी नहीं हुई है. विश्व में अब भी ज़्यादातर लोगों को मानव तस्करी की इस त्रासदी की भयावहता का सही अंदाज़ा नहीं है."

आई ओ एम के प्रवक्ता जुम्बी उमरी जुम्बी के अनुसार रिपोर्ट में संगठन के 150 से ज़्यादा मिशनों से जानकारी एकत्र की गई.

 फ़लस्तीनियों के लिए जापान की अतिरिक्त सहायता राशि

जापान सरकार ने फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में संयुक्त राष्ट्र सहायता एजेंसी के आपातकार्य में मदद के लिए बीस लाख डॉलर की अतिरिक्त राशि की सहायता दी है.

एजेंसी ने बताया है कि जापान की दी हुई ये अतिरिक्त मदद राशि ग़ाज़ा क्षेत्र में उन फ़लस्तीनी शरणार्थियों को सहायता मुहैया कराने में ख़र्च की जाएगी जो हाल ही में हुई हिंसा से प्रभावित हुए हैं.

इस सहायता में बच्चों और वयस्कों के लिए साफ़ सफ़ाई के उपकरण और आपात बिस्तर वग़ैरा मुहैया कराए जाएंगे.

सहायता एजेंसी का कहना है कि ग़ाज़ा पर इसराइल के हाल के हमले में ख़ासतौर से तटवर्ती इलाक़ों में आम लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ा है.

ग़ाज़ा पर हुआ इसराइल का वो हमला आठ दिन तक चला था. उस हमले के दौरान लगभग 12 हज़ार फ़लस्तीनियों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा था.

संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी ने उनके लिए दो स्कूलों में शरणार्थी शिविर बनाए थे.

एजेंसी ने बताया कि वर्ष 2012 में जापान से क़रीब सवा दो करोड़ डॉलर की सहायता मिल चुकी है और जापान मदद करने वाले देशों में नवें स्थान पर आ गया है.

ग़रीबी उन्मूलन और पर्यावरण सुरक्षा के लिए ईको पर्यटन

संयुक्त राष्ट्र के विश्व पर्यटन संगठन यूएनडब्ल्यूटीओ (UNWTO) ने उस प्रस्ताव का ज़ोरदार स्वागत किया है जिसमें ग़रीबी उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के लिए ईको-पर्यटन को महत्व देने की बात कही गई है.

UNWTO के महासचिव तालिब रिफ़ई ने कहा कि इस प्रस्ताव को जो असाधारण समर्थन मिला है उससे साफ़ झलकता है कि पर्यावरण का ख़याल रखने वाला पर्यटन सभी के लिए टिकाऊ और भेदरहित भविष्य बनाने में अहम भूमिका निभाएगा.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस प्रस्ताव में सदस्य देशों से ऐसी नीतियाँ बनाने का आहवान किया गया है जिनके ज़रिए पर्यावरण मैत्री पर्यटन की महत्ता दर्शाई जाए.

साथ ही लोगों की आमदनी, कामकाज, शिक्षा उपलब्ध कराने और ग़रीबी और भूख के ख़िलाफ़ संघर्ष में उसके सकारात्मक प्रभाव को भी दर्शाया जाए.

प्रस्ताव में ये भी ज़ोर दिया गया है कि पर्यावरण मैत्री पर्यटन से जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध होते हैं.

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