27/05/2013

पानी बचत के लिए प्राकृतिक ढाँचा काफ़ी

सुनिए /

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि बढ़ती आबादी की पानी की ज़रूरतें पूरी करने के लिए प्राकृतिक ढाँचा ही इस्तेमाल में लाया जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सन्धि के सचिवालय के प्रवक्ता डेविड एन्सवर्थ ने ये ख़याल ज़ाहिर किया है.

पानी का आनन्द लेता एक बच्चा

पानी का सदुपयोग बेहद ज़रूरी बताया जा रहा है

डेविड एन्सवर्थ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने 22 मई को अन्तरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया है जिसका विषय 'जल और जैव विविधता' था.

ग़ौरतलब है कि फ़सलों की सिंचाई के लिए भारी मात्रा में पानी का इस्तेमाल होता है.

डेविड एन्सवर्थ का कहना था कि भविष्य में जल आपूर्ति की बात करें तो दुनिया के कुछ क्षेत्रों में पहले से ही पानी की भारी क़िल्लत हो चुकी है. इनमें मध्य पूर्व के कुछ देश शामिल हैं जहाँ विशाल रेगिस्तान हैं.

डेविड एन्सवर्थ ने कहा कि यहाँ तक कि अमरीका महाद्वीप जैसे धनी क्षेत्रों में भी बहुत से इलाक़े ऐसे हैं जहाँ नदियाँ अब समुद्र तक नहीं पहुँच पाती हैं, “हम ये भली भाँति समझ सकते हैं कि आगे क्या होने वाला है.”

“दूसरी बात ये है कि हम ये भी जानते हैं कि पानी की समुचित आपूर्ति बनाए रखने के लिए क्या किया जा सकता है जिसमें परम्परागत ढाँचा बनाने की ज़रूरत ना हो. हम इसे प्राकृतिक ढाँचा कहते हैं. इसके तहत जंगलों – वनों की हिफ़ाज़त करना, गीले इलाक़ों को बचाना और नदियों का कुशल प्रबन्धन करना शामिल है.”

उन्होंने कहा कि अगर हम इस क़ुदरती व्यवस्था को ठीक से काम करने देते हैं तो ख़ुद ही पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होती रहेगी क्योंकि प्रकृति इसी तरह से काम करती है जो मानव के लिए हितकारी है.

डेविड एन्सवर्थ का कहना था कि इस वर्ष का जैव विविधता का अन्तरराष्ट्रीय दिवस भी उसी दिन रहा जिस दिन अन्तरराष्ट्रीय जल सहयोग दिवस मनाया गया.

Loading the player ...

कनेक्ट