22/07/2016

ये वायरस है छुपा रुस्तम

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि दुनिया भर में क़रीब 40 करोड़ लोग हेपेटाइटिस के संक्रमण के शिकार हैं मगर हर 20 में से सिर्फ़ एक मरीज़ ही ये जानता है कि उसे ये बीमारी है.

28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस के मौक़े पर इस बारे में ताज़ा जानकारी जारी की गई है और तमाम देशों का आहवान किया गया है कि हेपेटाइटिस के संक्रमण के परीक्षण और उसके इलाज के बारे में और ज़्यादा मुस्तैदी से काम लिया जाए.

संगठन ने कहा है कि लोगों को बिना किसी वजह के मौत के मुँह में जाने से रोकना होगा.

ये अपील उस मिशन का हिस्सा है जिसके तहत साल 2030 तक हेपेटाइटिस के संक्रमण को 90 फ़ीसदी तक कम करना होगा.

संगठन ने चिन्ता जताते हुए कहा है कि हेपेटाइटिस से संक्रमित हर तीन में से एक व्यक्ति को कैंसर या लिवर की बीमारी होने का ख़तरा होने लगा है.

इसमें कोई शक नहीं है कि हेपेटाइटिस बीमारी का ख़तरा बहुत गम्भीर होने लगा है मगर फिर भी बहुत से लोग इस ख़तरो को नहीं भाँप पा रहे हैं.

साल 2013 में क़रीब साढ़े 14 लाख लोगों की मौत हेपेटाइटिस के संक्रमण की वजह से हो गई थी.

“कभी ऐसा भी होता है कि किसी को 16 साल की उम्र में इंजेक्शन की सुई के ज़रिए हेपेटाइटिस का संक्रमण हो गया लेकिन 40 साल, 50 या 60 साल की उम्र होने पर इसका पता चलता है. इस दौरान कई दशकों तक इसकी बिल्कुल भी जानकारी नहीं होती.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन का ये भी कहना है कि ख़राब पानी, खाने-पीने की अन्य खराब चीज़ों, शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों और गन्दी सुइयों की वजह से शरीर में दाख़िल होने वाला ये वायरस दशकों तक ख़ामोश भी पड़ा रह सकता है और संक्रमित व्यक्ति को इस ख़तरे की जानकारी भी नहीं होती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अन्तरराषट्रीय विशेषज्ञ और वैश्विक हेपेटाइटिस कार्यक्रम के टीम लीडर डॉक्टर स्तफ़ाँ विक्टर का था, “ये भी एक बहुत बड़ी वजह है कि लोगों का ध्यान हेपेटाइटिस से पैदा हो रहे ख़तरे की तरफ़ नहीं जाता है. क्योंकि हेपेटाइटिस का वायरस ख़ामोश है.”

“कई दशकों तक इस वायरस के संक्रमण के कोई लक्षण नज़र नहीं आते हैं. हेपेटाइटिस से संक्रमित माँ-बाप से ये संक्रमण बच्चों में चला जाता है.”

“कभी ऐसा भी होता है कि किसी को 16 साल की उम्र में इंजेक्शन की सुई के ज़रिए हेपेटाइटिस का संक्रमण हो गया लेकिन 40 साल, 50 या 60 साल की उम्र होने पर इसका पता चलता है. इस दौरान कई दशकों तक इसकी बिल्कुल भी जानकारी नहीं होती.”

हेपेटाइटिस के ख़तरे को देखते हुए मई 2016 में 194 देशों की सरकारें एक नई रणनीति पर काम करने के लिए सहमत हुई हैं.

ग़ौरतलब है कि हेपेटाइटिस संक्रमण की कई क़िस्मों की पहचान की जा चुकी है जिनमें A, B, C, D और E तक के संक्रमण होते हैं.

मौजूदा रणनीति का मक़सद साल 2020 तक हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित 80 लाख लोगों का इराज करना है.

इन्हीं दो क़िस्मों के हेपेटाइटिस वायरस की वजह से सबसे ज़्यादा मौतें होती हैं.

डॉक्टर विक्टर का कहना है कि नवजात शिशुओं को जन्म के 24 घंटों के भीतर ही हेपेटाइटिस बी की दवा दे देनी चाहिए क्योंकि उसके बाद छह सप्ताह में अगर दवा दी जाए तो बहुत देर हो जाती है.

धनी देशों में हेपेटाइटिस का संक्रमण अक्सर इंजेक्शन की सुइयों के ज़रिए फैलता है.

जबकि ग़रीब देशों में ये बीमारी चिकित्सा सेवाओं में साफ़-सफ़ाई में कोताही की वजह से ज़्यादा होती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि धनी और ग़रीब देशों में तमाम मामलों में ये सतर्कता बरती जाए कि हर एक व्यक्ति का परीक्षण हो ताकि शक़ की कोई गुंजाइश ही ना बचे.

रिपोर्ट प्रस्तुति: महबूब ख़ान