18/05/2013

छोटे उत्पादकों की मदद का समझौता

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खाद्य और कृषि संगठन यानी एफ़ ए ओ और अन्तरराष्ट्रीय Slow Food (स्लो फूड) संगठन ने छोटे किसानों, दुकानदारों और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले अन्य लोगों की आजीविका में सुधारने के लिए हाथ मिलाया है.

 एफ़ ए ओ के महानिदेशक होज़े ग्रेज़ियानो डी सिल्वा और Slow Food संगठन के अध्यक्ष कार्लो पेटरीनी

दोनों संगठन छोटे उत्पादकों की मदद के लिए प्रयास करेंगे

इटली की राजधानी रोम में इस आशय का एक समझौता हुआ जो तीन साल तक चलेगा. इसके तहत दोनों संगठन स्थानीय, राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर कृषि प्रणालियों और खाद्य उत्पादन के ऐसे तरीक़ों को बढ़ावा देंगे जिनमें स्थानीय लोगों का सामूहिक योगदान हो और उनके हित भी सुनिश्चित हों.

इस समझौते के तहत ऐसे अभियान चलाए जाएंगे जिनमें खाद्य उत्पादन और बिक्री के स्थानीय, क्षेत्रीय और वैश्विक नैटवर्कों को मज़बूत किया जा सके.

साथ ही अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही योजनाओं के बारे में जागरूकता भी फैलाई जाएगी. इनमें वर्ष 2014 को अन्तरराष्ट्रीय पारिवारिक कृषि वर्ष के रूप में मनाए जाने के बारे में जागरूकता शामिल है.

इन प्रयासों में स्थानीय खाद्य पदार्थों और ऐसी फ़सलों की महत्ता दर्शाने पर ज़ोर दिया जाएगा जिन्हें नज़रअन्दाज़ कर दिया जाता है. साथ ही बाज़ारों तक छोटे किसानों की पहुँच सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया जाएगा.

इसके अलावा खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने और जैव विविधता को भी बढ़ावा दिया जाएगा जिससे खाद्य पदार्थों की बर्बादी से होने वाले नुक़सान को रोकने के साथ-साथ पशुओं की देखभाल भी बेहतर की जा सकेगी.

खाद्य और कृषि संगठन एफ़ ए ओ के महानिदेशक होज़े ग्रेज़ियानो डी सिल्वा का कहना था, "Slow Food (स्लो फूड) और एफ़ ए ओ का इस बारे में समान नज़रिया है कि विश्व को एक टिकाऊ और ग़रीबी रहित स्थान बनाया जाए जिसमें आने वाली पीढ़ियों के लिए जैव विविधता की हिफ़ाज़त की जा सके. दोनों एजेन्सियों के बीच इस समझौते से बहुत से उपाय एकजुट किए जा सकेंगे जिनसे लक्ष्य हासिल करने में ठोस मदद मिलने की उम्मीद है."

Slow Food संगठन के अध्यक्ष कार्लो पेटरीनी का कहना था, "इन दोनों संगठनों के बीच सहयोग इस साझा उद्देश्य से जन्मा है कि समृद्ध स्थानीय परम्पराओं की हिफ़ाज़त की जाए और खाद्य जैव विविधता की सुरक्षा की जाए. और ऐसा करके छोटे किसानों और खाद्य पदार्थों के उत्पादकों की मदद की जाए."

ये दोनों संगठन जो गतिविधियाँ चलाएंगे उनमें ग्रामीण किसानों और समुदायों की सांस्कृतिक विरासत की हिफ़ाज़त करना और परम्परागत रूप से उगाए जाने वाले खाद्य पदार्थों की हिफ़ाज़त और उन्हें बढ़ावा देना शामिल है.

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