1/07/2016

सुरक्षा परिषद के 5 नए सदस्य

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सुरक्षा परिषद के लिए पाँच नए अस्थाई सदस्य चुने गए हैं. इन देशों के नाम हैं – बोलीविया, इथियोपिया, कज़ाख़्स्तान और स्वीडन.

इन देशों का दो साल का कार्यकाल जनवरी 2017 में शुरू होगा. इटली और नैदरलैंड ने भी इस सदस्यता के लिए आवेदन किया था लेकिन मतदान के बाद पाँचवें और अन्तिम स्थान के लिए दोनों को बराबर वोट मिले.

आख़िर में ये तय किया गया कि दोनों देश एक-एक साल के लिए सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्य रहेंगे.

ग़ौरतलब है कि सुरक्षा परिषद की ज़िम्मेदारी पूरी दुनिया में शान्ति और सुरक्षा बनाए रखना है.

इस लक्ष्य की ख़ातिर ज़रूरत पड़ने पर सुरक्षा परिषद चाहे तो किसी भी देश पर या तो प्रतिबन्ध लगा सकती है या फिर सैन्य ताक़त के इस्तेमाल की भी इजाज़त दे सकती है.

सुरक्षा परिषद का हर फ़ैसला संयुक्त राष्ट्र के तमाम 193 सदस्य देशों पर बाध्यकारी है.

सुरक्षा परिषद के कुल सदस्यों की संख्या 15 है जिनमें से पाँच स्थाई और 10 अस्थाई सदस्य हैं. 10 अस्थाई सदस्य देशों का कार्यकाल दो साल का होता है.

इस तरह हर साल पाँच नए सदस्य चुने जाते हैं. अंगोला, मलेशिया, न्यूज़ीलैंड, स्पेन और वेनेज़ुएला का कार्यकाल साल 2016 में समाप्त हो रहा है.

इन देशों का स्थान जनवरी 2017 में बोलीविया, इथियोपिया, कज़ाख़्स्तान और स्वीडन लेंगे.

स्थाई सदस्य देशों के नाम हैं – अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन. इन स्थाई देशों को वीटो का अधिकार है.

वैसे तो सभी 15 सदस्य देशों को किसी भी प्रस्ताव या मुद्दे पर वोट देने का अधिकार है मगर पाँच स्थाई देशों में से अगर एक भी देश वीटो का इस्तेमाल कर देता है तो वो प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता.

यानी पाँच स्थाई देशों में से कोई भी सदस्य देश वीटो के ज़रिए किसी भी प्रस्ताव को पारित होने से रोक सकता है.

रिपोर्ट प्रस्तुति: महबूब ख़ान