4/05/2013

सड़कें बनीं पैदल यात्रियों की मौत का रास्ता

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दुनिया भर में सड़कों पर समुचित सुरक्षा नहीं होने और ग़ैर-ज़िम्मेदारी के साथ वाहन चलाने की वजह से हर वर्ष दो लाख 70 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान चली जाती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि बहुत से देशों में सड़क सुरक्षा में ये कमी लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए एक बड़ा ख़तरा बन गई है, और बहुत से देशों में तो सड़कों पर पैदल चलना या साईकिल तक चलाना भी दूभर हो गया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि सड़कों पर दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में आधी संख्या पैदल चलने वालों की होती है जिनमें साईकिल और मोटर साईकिल चलाने वाले भी शामिल होते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के हिंसा और विकलांगता रोकने वाले विभाग की डॉक्टर इथीयेन क्रूग का कहना है कि सड़कों पर होने वाली इन मौतों को रोकने के लिए ठोस क़दम उठाकर बहुत से लोगों की जान बचाई जा सकती है.

“सबसे पहले तो हमें तेज़ रफ़्तार और शराब पीकर वाहन चलाने की आदत पर रोक लगानी होगी. इसके अलावा ज़रूरत ये भी है कि सड़कों के किनारे पैदल चलने वालों के लिए समुचित सुविधाएँ मुहैया कराई जाएँ. इनमें सड़क किनारे फुटपाथ हों, सड़क पार करने के लिए पुल और ज़ेबरा क्रॉसिंग वग़ैरा बनाए जाएँ. ऐसा करके पैदल यात्रियों को वाहनों से अलग किया जा सकता है जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.”

उन्होंने कहा कि यात्रियों को भी जागरूक बनाना होगा ताकि वो भी यातायात नियमों का सम्मान और पालन करें. पैदल यात्रियों को भी शराब पीकर सड़क पर चलने और सड़क पार करने से रोकना होगा.

ध्यान देने की बात है कि संयुक्त राष्ट्र विश्व सड़क सुरक्षा सप्ताह छह से 12 मई तक मनाया जा रहा है.

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