26/04/2013

भारत में शिक्षा का दर्जा सुधारने की ज़रूरत

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भारत में शिक्षा की पहुँच और गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयासों के तहत 21 से 27 अप्रैल तक एजूकेशन फ़ॉर ऑल यानी सभी के लिए शिक्षा सप्ताह मनाया गया जिसका मुख्य विषय था  Every Child Needs a Teacher यानी हर बच्चे को शिक्षक की ज़रूरत है.

बहुत से बच्चों के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं

हर वर्ष Education for All यानी सभी के लिए शिक्षा अभियान के तहत किसी एक लक्ष्य को मुख्य विषय बनाकर इस ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जाती है.

इस वर्ष समापन सेमिनार का आयोजन दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेन्टर में किया गया जिसे यूनेस्को की भारत ईकाई, भारत में संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र और भारत के एक ग़ैर सरकारी संगठन नेशनल कोआलीशन फ़ॉर एजूकेशन यानी राष्ट्रीय शिक्षा गठबंधन (एन सी ई) ने मिलकर 25 अप्रैल को आयोजित किया.

यूनेस्को के भारत निदेशक शीगेरू आओयागी का कहना था कि शिक्षकों की भूमिका की महत्ता को समझना होगा और अगर शिक्षकों की कमी है तो उसे दूर करना होगा. इस रास्ते में आने वाली चुनौतियों को भी समझना होगा.

"प्रशिक्षित शिक्षकों की पर्याप्त संख्या में मौजूदगी के बिना सभी के लिए शिक्षा का लक्ष्य हासिल ही नहीं किया जा सकता है. एक चुनौती ये भी है कि बच्चे स्कूलों में पढ़ाई अधूरी ही छोड़ देते हैं. क़रीब 81 लाख बच्चों की ज्ञान और सूचना तक पहुँच ही नहीं है. यूनेस्को इस बात को लेकर भी बहुत चिन्तित है कि लगभग 25 प्रतिशत से शिक्षक स्कूलों से अनुपस्थित रहते हैं जोकि एक अत्यन्त गम्भीर समस्या है. इसके अलावा शिक्षकों की गुणवत्ता भी एक बहुत अहम मुद्दा है."

राष्ट्रीय शिक्षा गठबंधन (एनसीई) के महासचिव रामपाल सिंह ने कहा कि भारत जैसे देश में जबकि 12 लाख शिक्षकों की कमी है तो यहाँ सभी के लिए शिक्षा का सपना कैसे साकार हो सकता है. उन्होंने कहा कि अगर हमें भारत को एक शिक्षित राष्ट्र बनाना है तो पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षकों को नियमित रूप में नियुक्त करना होगा जिनका मुख्य कार्य बच्चों को शिक्षा देना ही हो.

उनका ये भी कहना था कि सभी को शिक्षा मुहैया कराने का सपना तभी साकार होगा जब इसमें सभी एकजुट होकर अपना योगदान करें.

इस सेमिनार में भारत में संयुक्त राष्ट्र सूचना केन्द्र की निदेशक किरण मेहरा किरपलमैन ने भी अपने विचार रखे. उनका कहना था कि शिक्षा हासिल करना सभी का मूलभूत अधिकार है, इसे सिर्फ़ कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं बनाया जा सकता.

"शिक्षा एक ऐसा सर्वश्रेष्ठ निवेश है जो कोई भी राष्ट्र अपने नागरिकों में कर सकता है और जिसके ज़रिए प्रगतिशिल, स्वस्थ, समान समाज का निर्माण किया जा सकता है. ये भी ध्यान रहे कि शिक्षा के सिर्फ़ प्रसार पर ही ध्यान ना दिया जाए बल्कि गुणवत्ता वाली शिक्षा हासिल करना हर बच्चे का अधिकार है. रहने की जगह, ग़रीबी, लिंग भेदभाव या किसी और वजह से किसी भी बच्चे को शिक्षा हासिल करने से वंचित नहीं किया जा सकता."

इस सेमिनार में स्कूलों, छात्रों, अभिभावकों, शिक्षक संगठनों, सांसदों, शिक्षाविदों, राष्ट्रीय और अन्तररराष्ट्रीय ग़ैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

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