26/04/2013

कार्यस्थलों को बेहतर बनाना बेहद ज़रूरी

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कामकाज की ख़राब परिस्थितियों की वजह से होने वाली अनेक बीमारियों को रोकने के लिए विश्व स्तर पर तत्काल और सघन अभियान चलाने का अहवान किया गया है. इन बीमारियों की वजह से हर वर्ष लगभग बीस लाख लोगों की जान चली जाती है.

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानी आई एल ओ का कहना है कि दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मुक़ाबले कामकाज के ख़राब हालात से होने वाली बीमारियों से छह गुना ज़्यादा मौतें होती हैं लेकिन फिर भी दुर्घटना मामलों को ही ज़्यादा ध्यान मिलता है.

आई एल ओ के महानिदेशक गुई राइडर ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य के विश्व दिवस के अवसर पर अपने वक्तव्य में कहा कि कामकाज के ख़राब हालात से होने वाली बीमारियों का बोझ कम करने का सबसे कारगर तरीक़ा ये है कि इन बीमारियों को होने ही ना दिया जाए और ऐसा कामकाज के हालात बेहतर बनाकर किया जा सकता है.

साथ ही बीमारियों की रोकथाम, उनके होने के बाद इलाज के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा प्रभावशाली और किफ़ायती साबित होती है.

गाई राइडर का कहना था, "कामकाज के ख़राब हालात की वजह से होने वाली बीमारियों के कारण लोगों और उनके परिवारों पर बहुत बुरा असर पड़ता है और इसकी वजह से अगर बहुत रचनात्मक कामकाजी लोगों को खोना पड़ता है तो रोज़गार देने वाले संगठनों को भारी नुक़सान और ख़ामियाज़ा उठाना पड़ता है."

"इससे उद्योग क्षेत्रों की उत्पादकता पर भी बुरा असर पड़ता है और सरकारों का वित्तीय बोझ भी बढ़ता है. इसके अलावा स्वास्थ्य की देखभाल और इलाज पर भी भारी ख़र्च बढ़ जाता है. जिन देशों में सामाजिक सुरक्षा कमज़ोर है या बिल्कुल ही नहीं है, वहाँ बहुत से कामकाजी लोगों और उनके परिवारों को वो सुरक्षा और सहायता नहीं मिल पाते हैं जिनकी उन्हें ज़रूरत होती है."

आई एल ओ के महानिदेशक गाई राइडर ने एक ऐसी व्यापक रणनीति और मनोवृत्ति अपनाने का आहवान किया जिसमें कामकाज के ख़राब हालात की वजह से होने वाली बीमारियों के इलाज पर ना सिर्फ़ गम्भीर ध्यान दिया जाए बल्कि उन्हें होने से ही रोका जा सके.

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