26/04/2013

प्रजनन स्वास्थ्य बढ़ाने का काम अधूरा है

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संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ दल अन्तरराष्ट्रीय जनसंख्या और विकास सम्मेलन ने कहा है कि दुनिया भर में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए हुई ठोस प्रगति के बावजूद हर दिन 800 महिलाएँ गर्भ और बच्चों को जन्म देने के समय होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं की वजह से अपनी जान से हाथ धो बैठती हैं.

इस उच्च स्तरीय टास्क फ़ोर्स का कहना है कि यह एक ऐसा अधूरा काम है जिसे बीस वर्ष पहले हुए सम्मेलन में पूरा करने का संकल्प किया गया था. ये क़र्ज़ चुकाना बेहद ज़रूरी है.

इस टास्क फ़ोर्स ने 1994 में काहिरा में हुए जनसंख्या और विकास सम्मेलन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए देशों की सहायता के लिए कुछ सिफ़ारिशें जारी की हैं.

फ़िनलैंड की पूर्व राष्ट्रपति और इस सम्मेलन की सह अध्यक्ष तार्या हैलोनेन का कहना था, "हमारी पहली और दूरगामी सिफ़ारिश ये है कि सभी के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सम्बन्धी अधिकारों का ना सिर्फ़ सम्मान किया जाए बल्कि उन्हें ख़ूब प्रोत्साहन दिया जाए. और जब हम सभी के स्वास्थ्य और अधिकार शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो इसका बिल्कुल यही मतलब समझा जाना चाहिए."

"हमें समाज के तमाम तबकों को ये बुनियादी मानवाधिकार सुनिश्चित करने का माहौल तैयार करने के लिए सक्रिय करना होगा. और ऐसा किसी पूर्वाग्रह और भय के होना चाहिए.”

उन्होंने कहा कि लोगों को ये समझाना होगा कि मानव की यौन क्रियाएँ जीवन का एक सकारात्मक पहलू हैं जिसका मतलब ये है कि यौन क्रियाओं और प्रजनन मामलों में सहिष्णुता और सम्मान तो होना ही चाहिए लेकिन कोई भेदभाव या हिन्सा बिल्कुल नहीं होनी चाहिए.

इस टास्क फ़ोर्स का ये भी कहना है कि हालाँकि यौन और प्रजनन अधिकार मानव जीवन के आत्म सम्मान से जुड़े हुए हैं लेकिन अक्सर उनकी अनदेखी होती है या उनकी परवाह नहीं की जाती.

इतना ही नहीं, अक्सर इन अधिकारों का उल्लंघन होता है जिसमें हिंसा और दमन या डर का भी सहारा लिया जाता है.

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