16/10/2015

सुरक्षा परिषद के नए पाँच अस्थाई सदस्य

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) की पाँच अस्थाई सीटों के लिए नए सदस्य देशों का चयन हुआ है.

इन देशों के नाम हैं -  मिस्र, जापान, सेनेगल, यूक्रेन और उरुग्वे. इन पाँच अस्थाई देशों का दो साल का कार्यकाल जनवरी 2016 में शुरू होगा.

इन देशों का चुनाव निर्विरोध तरीक़े से हुआ है यानी किसी देश ने उनके चुने जाने का विरोध नहीं किया.

ये नए पाँच अस्थाई सदस्य जिन अन्य पाँच अस्थाई सदस्यों के साथ काम करेंगे, उनके नाम हैं – अंगोला, मलेशिया, न्यूज़ीलैंड, स्पेन और बेनेज़ुएला.

हालाँकि अस्थाई सदस्यों का कार्यकाल सिर्फ़ दो साल होता है लेकिन इसके साथ ख़ासी प्रतिष्ठा जुड़ी होती है.

“उसके पास कोई ख़ास कार्यक्रम की रूपरेखा भी होनी चाहिए. सुरक्षा परिषद की सदस्यता हासिल करने के इच्छुक देशों के पास एक टीम बनाने का हुनर और संसाधन भी होने चाहिए. “

इसके बावजूद दुनिया के 68 देश ऐसे हैं जिन्हें कभी भी सुरक्षा परिषद की अस्थाई सदस्यता हासिल करने का गौरव हासिल नहीं हुआ है.

General Assembly Affairs Division के डायरेक्टर इयन बॉटनैरू का कहना था, “सुरक्षा परिषद की सदस्यता हासिल करने के लिए किसी देश के पास एक ख़ास एजेंडा होना बहुत ज़रूरी है.”

“अगर कोई देश छोटा है और संवेदनशील इलाक़ों में उसके कोई दूतावास या प्रतिनिधि नहीं हैं तो ऐसे देशों के प्रतिनिधिमंडल को सुरक्षा परिषद में अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने में बहुत मुश्किलें पेश आ सकती हैं.”

ग़ौरतलब है कि सुरक्षा परिषद के कुल 15 सदस्य होते हैं जिनमें से पाँच स्थाई हैं और उनके नाम हैं – अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और रूस.

इन्हीं पाँच स्थाई देशों के पास असली ताक़त है और वो अक्सर वीटो के ज़रिए अपनी इस ताक़त का इस्तेमाल भी करते हैं.

अगर कोई स्थाई सदस्य देश किसी मुद्दे पर वीटो कर देता है तो वो सुरक्षा परिषद के सामने विचार विमर्श के लिए आएगा ही नहीं.

या किसी प्रस्ताव पर चर्चा के बाद मतदान होता है और कोई स्थाई देश उस पर वीटो कर देता है तो वो प्रस्ताव वहीं रुक जाता है. 10 अस्थायी सदस्यों को वीटो अधिकार नहीं होता है.

रिपोर्ट प्रस्तुति: महबूब ख़ान