22/04/2013

जलवायु परिवर्तन फ़ौरन ख़तरा, महिला शिक्षा में निवेश फ़ायदे का सौदा

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जलवायु परिवर्तन मानवता के लिए साफ़ और फौरन ख़तरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने आगाह किया है कि जलवायु परिवर्तन दुनिया भर में विकास के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है.

Secretary-General Ban Ki-moon attends Ministerial Dialogue on Sustainable Development .

जलवायु परिवर्तन को फ़ौरी ख़तरा क़रार दिया गया है

महासचिव ने अमरीका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की बैठक के अवसर पर सरकारी और निजी दानदाताओं से मुलाक़ात के दौरान ये चेतावनी भरी बात कही.

बान की मून ने कहा कि सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों को हासिल करने की समय सीमा 2015 है, उसमें 1000 दिन बचे हैं और कामयाबी नज़र भी आती है.

लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि इस दिशा में ठोस काम सिर्फ़ 2015 में ही समाप्त नहीं हो जाएगा, क्योंकि सरकारों के लिए एक अलग और उतना ही महत्वपूर्ण कार्य ये है कि वो वर्ष 2015 तक जलवायु परिवर्तन पर एक क़ानूनी रूप से बाध्य वैश्विक समझौता अवश्य कर लें.

महासचिव बान की मून का कहना था, "जलवायु परिवर्तन मानवता के लिए, पृथ्वी ग्रह के लिए सबसे बड़ा, साफ़ नज़र आने वाला और फ़ौरी ख़तरा है. इतना ही नहीं, ये हमारी विकास योजनाओं और लक्ष्यों के लिए और सभी क्षेत्रों में – छोटी बड़ी सभी तरह की अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी गंभीर ख़तरा है."

उन्होंने कहा कि इस ख़तरे का सबसे ज़्यादा असर ग़रीब और नाज़ुक स्थिति में रहने वाले लोगों पर सबसे ज़्यादा होता है, लेकिन इतना भी स्पष्ट है कि इसके असर से कोई भी देश अछूता नहीं रहेगा.

बान की मून ने कहा कि वो अगले वर्ष न्यूयॉर्क में एक उच्च स्तरीय सम्मेलन करेंगे जिसमें भाग लेने वाले विश्व नेताओं को ऐसे समाधानों पर विचार करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा जिनके तहत एक महत्वकांक्षी और लक्ष्य हासिल करने वाला समझौता किया जा सके.

टिकाऊ वन प्रबंधन के लिए फ़ोरम में सहमति

वनों पर संयुक्त राष्ट्र के फ़ोरम ने तुर्की में अपना दसवाँ सत्र शनिवार को संपन्न किया जिसमें दुनिया भर में वनों के टिकाऊ प्रबंधन में सुधार लाने के लिए कुछ उपायों पर सहमति हुई.

वन संरक्षण के प्रयास

वनों के टिकाऊ प्रबंधन में सुधार पर ज़ोर दिया गया

इस फ़ोरम का ये सत्र पिछले एक पखवाड़े से तुर्की की राजधानी इस्ताम्बूल में चल रहा था. सत्र में दो घोषणा पत्रों पर आम सहमति बनी जिनमें टिकाऊ विकास में वनों और जंगलों के महत्वपूर्ण योगदान और भूमिका को स्वीकार किया गया.

फ़ोरम में सभी देशों की सरकारों का आहवान किया गया कि वो वनों और जंगलों के टिकाऊ प्रबंधन में सुधार लाने के लिए सभी संभव क़दम उठाएँ.

इनमें जंगलों के कम होने और उनकी गुणवत्ता घटने के कारणों के बारे में आँकड़े एकत्र करना भी शामिल है.

फ़ोरम में इन प्रयासों को सहायता देने के लिए वैश्विक स्तर पर एक स्वैच्छिक कोष भी स्थापित करने पर ग़ौर करने का फ़ैसला किया गया.

संयुक्त राष्ट्र वन सचिवालय की निदेशक जैन मैकअल्पाइन का कहना था, "बहुत से अहम मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया. इनमें आर्थिक विकास और वनों के अस्तित्व के बारे में भी अहम मुद्दे रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर पूरी दुनिया में ही बहुपक्षीय विचार विमर्श नहीं हुआ है. इसलिए इस फ़ोरम में वनों और जंगलों और आर्थिक विकास के बीच सम्बन्धों के बारे में इस तरह के मुद्दों पर विचार विमर्श का स्तर उठाया गया है."

इस्ताम्बूल में हुए इस सम्मेलन का मुख्य विषय वन और आर्थिक विकास के बीच संबंध था.

जैन मैकअल्पाईन ने कहा कि ये बैठक बहुत महत्वपूर्ण और कई मायनों में ऐतिहासिक रही. उन्होंने इस सम्मेलन की मेज़बानी करने के लिए तुर्की सरकार और वहाँ के लोगों का शुक्रिया अदा किया. 

लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा में निवेश ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि दुनिया भर में लड़कियों को शिक्षित करने की सख़्त ज़रूरत है.

बान की मून और गॉर्डन ब्राउन

महिला शिक्षा को राष्ट्र विकास की धुरी कहा गया

अमरीका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित विश्व बैंक के मुख्यालय में आयोजित ग्लोबल एजूकेशन फ़र्स्ट पहल की एक उच्च स्तरीय बैठक में ये बात कही.

इस योजना को सितम्बर 2012 में शुरू किया गया था. बान की मून ने कहा कि इस पहल के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ये सम्मेलन एक महत्वपूर्ण क़दम है.

इन लक्ष्यों में सभी बच्चों को अच्छे दर्जे वाली और प्रासंगिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए जिसमें सभी बच्चों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित हो.

महासचिव ने कहा, "लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा में निवेश करना सबसे ज़्यादा मुनाफ़े का सौदा है. जब लड़कियाँ और महिलाएँ शिक्षित होती हैं तो वो अपने परिवार, समुदाय और राष्ट्र में विकास का रास्ता निर्धारित करती हैं. हमें इस हक़ीक़त को परिणामों में परिवर्तित करना होगा."

उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के साथ हुई बातचीत में इस राह में आ रही बाधाओं की पहचान पहले ही की जा चुकी है, विकास के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के पास लड़कियों और महिलाओं में शिक्षा प्रसार के लिए बहुत अच्छे-अच्छे विचार हैं.

इस अवसर पर ग्लोबल एजूकेशन यानी वैश्विक शिक्षा पर महासचिव के विशेष दूत – पूर्व ब्रितानी प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने भी विचार व्यक्त किए.

उन्होंने कहा कि लोगों की समझ में आ गया है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था की कामयाबी के लिए शिक्षा की क्या महत्ता है. कोई देश तब तक उच्च आय वाला देश नहीं बन सकता जब तक कि वो शिक्षा में खुलकर धन और संसाधन निवेश नहीं करेगा.

इस सम्मेलन में स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की सबसे बड़ी संख्या वाले आठ देशों के शिक्षा और वित्त मंत्रियों ने भी हिस्सा लिया, जिनमें भारत, बांग्लादेश, कांगो गणराज्य, इथियोपिया, हेयती, नाईजीरिया, यमन और दक्षिणी सूडान शामिल हैं.

दुनिया भर में छह करोड़ से ज़्यादा बच्चे प्राइमरी स्कूल नहीं जा पाते हैं और उसकी आधी संख्या इन आठ देशों में ही रहती है.

महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा पर विशेष प्रतिनिधि की भारत यात्रा

 महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के बारे में संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि राशिदा मन्जू 22 अप्रैल से एक मई तक भारत की यात्रा करेंगी.

राशिदा मन्जू

राशिदा मन्जू अनुभवों के आधार पर रिपोर्ट सौंपेंगी

भारत में महिलाओं के प्रति हिंसा की स्थिति का आकलन करने के लिए किसी ऐसे स्वतंत्र और निष्पक्ष विशेषज्ञ की यह पहली भारत यात्रा होगी जिन्हें मानवाधिकार परिषद ने दुनिया भर में महिलाओं के प्रति हिंसा, उसके कारणों और प्रभावों की निगरानी की ज़िम्मेदारी सौंपी है.

राशिदा मन्जू का कहना है कि महिलाओं के प्रति हिंसा विश्व भर में आज भी मानवाधिकारों का एक सबसे व्यापक उल्लंघन है और दुनिया का हर देश इससे प्रभावित है.

उन्होंने ख़याल ज़ाहिर किया कि भारत महिलाओं के प्रति हिंसा के मुद्दे के समाधान और देश में महिलाओं के अधिकारों को और आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है.

राशिदा मन्जू ने कहा कि वो महिलाओं के प्रति हिंसा, उसके कारणों और प्रभावों के बारे में सबसे व्यापक संभव अर्थों में देखना चाहती हैं.

बर्बरता से सामूहिक दुष्कर्म की शिकार युवती की त्रासदी सहित हाल में हुई घटनाओं ने क़ानूनों, नीतियों, प्रथाओं और बाधाओं पर नए सिरे से ग़ौर करने और क़ानूनों व नीतियों को असरदार ढंग से लागू करने का अवसर प्रदान किया है.

विशेष प्रतिनिधि राशिदा मन्जू अपनी दस दिन की भारत यात्रा के दौरान दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और अन्य क्षेत्रों में सरकारी अधिकारियों और समाज के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात करेंगी.

उन्होंने आशा व्यक्त की कि सरकार और समाज के प्रतिनिधियों के साथ उनकी बातचीत देश में हिंसा से संघर्ष के बारे में जारी चर्चाओं और प्रयासों में थोड़ा बहुत योगदान कर पाएगी.

अपनी इस भारत यात्रा के दौरान प्राप्त जानकारी के आधार पर राशिदा मन्जू संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के आगामी सत्र में अपने अंतिम निष्कर्ष और सिफ़ारिशें पेश करेंगी.

मार्गरेट थैचर को सुरक्षा परिषद की श्रद्धांजलि

ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर

मार्गरेट थैचर को आयरन लेडी भी कहा जाता था

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर को श्रद्धांजलि अर्पित की है.

मार्गरेट थैचर का हाल ही में निधन हो गया था.

बैरोनेस थैचर ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं जिन्हें आयरन लेटी यानी लौह महिला भी कहा जाता था.

बुधवार को सुरक्षा परिषद की बैठक मार्गरेट थैचर के सम्मान में कुछ क्षणों का मौन रखने का साथ ही शुरू हुई.

अप्रैल महीने के लिए सुरक्षा परिषद की अध्यक्ष  रवान्डा की विदेश मंत्री लुईज़ मुशीकिवाबो ने परिषद की तरफ़ से बैरोनेस थैचर के निधन पर शोक प्रकट किया और श्रद्धांजलि अर्पित की.

साथ ही मार्गरेट थैचर के परिवार, ब्रिटेन के नागरिकों और वहाँ की सरकार के साथ भी हमदर्दी का इज़हार किया गया, और कुछ लम्हों का मौन रखा गया.

मार्गरेट थैचर 1979 और 1990 के बीच ब्रिटेन की प्रधानमंत्री रही थीं.

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