5/04/2013

एक अरब से ज़्यादा भारी तनाव में, बेघरों की नींद अपराध

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एक अरब से ज़्यादा लोग गहन तनाव का शिकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि दुनिया भर में एक अरब से ज़्यादा लोग उच्च रक्त दबाव यानी तीव्र तनाव का शिकार हैं और वो अपना जीवन बहुत दबाव में जीते हैं.

ख़ासतौर से अफ्रीका में उच्च रक्त दबाव का चलन ज़्यादा देखा गया है जहाँ क़रीब 46 प्रतिशत वयस्क आबादी तीव्र तनाव का शिकार है.

तीव्र तनाव से बहुत सी अन्य बीमारियाँ हो जाती हैं

तीव्र तनाव से बहुत सी अन्य बीमारियाँ हो जाती हैं

हर वर्ष सात अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर उच्च रक्त चाप को नियंत्रित और नियमित करने का आहवान किया गया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि उच्च रक्त चाप दिल, गुर्दों और अंधेपन से संबंधित बीमारियों का प्रमुख कारण बन गया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का ख़याल है कि अगर लोगों को अपने रक्त चाप के बढ़े हुए स्तर की जानकारी हो तो वो इसे नियंत्रित और नियमित रखने के लिए क़दम उठा सकते हैं जिससे अन्य बीमारियाँ पनपने से रोकी जा सकती हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की डॉक्टर शान्ति मेन्डिस बताती हैं कि किस तरह से उक्त रक्त चाप के ख़तरों को कम किया जा सकता है, "अक्सर लोगों को बढ़े हुए रक्त चाप का तब तक पता नहीं चल पाता जब तक कि कोई अन्य रोग या स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएँ पैदा नहीं हो जाती हैं. इसलिए ये ज़रूरी है कि लोगों को उच्च रक्त चाप के अपने स्तर के बारे में सटीक जानकारी होनी चाहिए."

"लोगों को ख़ासतौर से 40 वर्ष की उम्र के बाद अपना रक्त चाप की समय-समय पर जाँच कराते रहना चाहिए क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ-साथ आमतौर पर रक्त चाप का स्तर बढ़ता है."

डॉक्टर शान्ति मैन्डिस का कहना था कि ये सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि आप खाने में नमक की मात्रा कम कर दें, फल और सब्ज़ियाँ ज़्यादा खाएँ क्योंकि इनमें पोटेसियम और एंटी ऑक्सिडेंट ज़्यादा होते हैं. मदिरापान कम करें और वज़न सही रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करते रहें.

उनका कहना था कि ये भी सुनिश्चित करना होगा कि भोजन सामग्री की मात्रा कम ही हो ताकि आपका वज़न ना बढ़े. इन सभी तत्वों पर अमल करके उच्च रक्त चाप पर नियंत्रण किया जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने सितम्बर 2011 में असंचारी रोग पर एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे.

लोगों को अपना रक्त चाप मापने के लिए प्रोत्साहित करने का अभियान उसी घोषणा पत्र का हिस्सा है.

जॉर्डन और ईराक़ में सीरियाई बच्चों के लिए भोजन व्यवस्था

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम ने जॉर्डन और ईराक़ में शरणार्थी शिविरों में रह रहे लगभग साढ़े दस हज़ार सीरियाई बच्चों के लिए भोजन व्यवस्था की है.

ये अभियान स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली भोजन सहायता योजना का हिस्सा है. इस परियोजना का उद्देश्य बच्चों में पोषण को बढ़ावा देना और उन्हें स्कूल में जाने के लिए प्रोत्साहित करना है.

हज़ारों सीरियाई बच्चे शिक्षा से वंचित हैं

जॉर्डन के ज़ातारी शरणार्थी शिविर में यूनीसेफ़ दो स्कूल चला रहा है जहाँ लगभग छह हज़ार बच्चों को दोपहर का भोजन दिया जाता है.

ईराक़ में साढ़े चार हज़ार से ज़्यादा बच्चों को स्कूल में दोपहर का भोजन दिए जाने की परियोजना का लाभ मिल रहा है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम की एलिज़ाबेथ बिर्स का कहना है कि एजेंसी की योजना है कि जॉर्डन में क़रीब तीस हज़ार सीरियाई बच्चों तक दोपहर का भोजन पहुँचाया जाएगा. साथ ही ईराक़ में भी क़रीब छह हज़ार बच्चों को स्कूल में दोपहर का भोजन मुहैया कराने का इरादा है.

एलिज़ाबेथ बिर्स का कहना था, "एलिज़ाबेथ कह रही थीं कि कुछ बच्चे स्कूल जाना पसंद नहीं करते हैं."

"हम स्कूल में दोपहर का भोजन देने की इस योजना के ज़रिए बच्चों में पोषण सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें स्कूल में पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. नहीं तो ये पीढ़ी पढ़-लिख नहीं सकेगी जिससे बड़ा नुक़सान होगा."

एलिज़ाबेथ बिर्स का कहना था कि इन बच्चों को स्कूल में रोके रखना होगा जिससे वो अपनी पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान लगा सके, और साथ ही उनके साथ जो ख़राब हालात रहे हैं, वो उसे भुला सकें और उसके प्रभाव से बाहर आ सकें.

हालाँकि विश्व खाद्य कार्यक्रम का ये भी कहना है कि जॉर्डन और ईराक़ में स्कूल में भोजन मुहैया कराने की योजना जारी रखने के लिए उसे इस वर्ष के अन्त तक सात लाख 80 हज़ार डॉलर की अतिरिक्त राशि की ज़रूरत पड़ेगी.

बेघरों को अपराधी क़रार देने वाला क़ानून वापिस लेने का आहवान

संयुक्त राष्ट्र से संबंद्ध निष्पक्ष विशेषज्ञों ने हंगरी सरकार से हाल ही में बनाए गए उस क़ानून को वापिस लेने का अनुरोध किया है जिसमें बेघर लोगों को अपराधी की श्रेणी में रखने का प्रावधान किया गया है.

हंगरी की संसद ने सोमवार को एक ऐसा संविधान संशोधन पारित किया जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर रहने और सोने को ग़ैरक़ानूनी क़रार दे दिया गया है.

बेघर लोगों के सार्वजनिक स्थलों पर सोना अपराध

बेघर लोगों के सार्वजनिक स्थलों पर सोना अपराध

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ रक्वैल रॉलनिक और मैगदलीना सैपुलवेदा ने ज़ोर देकर कहा कि ये क़ानून उन लोगों के साथ भेदभाव करता है जिनके पास कोई घर या रहने के लिए जगह नहीं है.

अत्यन्त ग़रीबी और मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत मैगदलीना सैपुलवेदा ने कहा कि इस तरह के क़ानून से बेघर लोग अपने मानवाधिकारों का आनन्द नहीं उठा सकेंगे. साथ ही इस क़ानून से ग़रीब और बेघर लोगों और उनकी अगली पीढ़ियों के ख़िलाफ़ पूर्वाग्रह पैदा हो जाएगा.

हंगरी सरकार का कहना है कि राजधानी में पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं है जिनमें तमाम बेघर लोगों को सेवाएँ मुहैया कराई जा सकें.

बुनियादी आवास पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत राक्वेल रॉलनिक ने आगाह किया कि जब ये सभी को मालूम है कि बेघर लोगों को सोने के लिए समुचित सुविधाएँ उपलब्ध नहीं है तो बेघर और कम आय वाले लोगों का सार्वजनिक स्थानों पर सोने को ग़ैर क़ानूनी क़रार दिया जाना – समानता और भेदभाव रहित जीवन जीने के मानवाधिकारों का उल्लंघन है.

इन दोनों विशेषज्ञों ने इस क़ानून को बनाने में दिखाई गई जल्दबाज़ी पर भी चिंता जताई क्योंकि इसमें आम नागरिकों से कोई सलाह – मश्विरा नहीं किया गया.

इस तरह के स्वतंत्र विशषज्ञों को जिनेवा स्थित मानवाधिकार परिषद नियुक्त करती है जो बिना किसी वेतन के काम करते हैं और विशेष मानवाधिकर स्थितियों के बारे में रिपोर्ट और अपनी विशेषज्ञ राय देते हैं.

कोरियाई प्रायद्वीप में घटनाक्रम पर गंभीर चिंता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ रहे तनाव पर गहरी चिंता जताई है.

महासचिव ने गुरूवार को मोनाको में कहा कि इस तनाव से वो बहुत व्यथित भी हैं, ख़ासतौर से उत्तर कोरिया की तरफ़ से बहुत नकारात्मक और भड़काऊ बयानबाज़ी हो रही है.

महासचिव ने कहा कि परमाणु धमकी कोई खेल नहीं है और उन्हें सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करना चाहिए.

उत्तर कोरिया ने इसी वर्ष फ़रवरी में परमाणु परीक्षण किया था जिसे सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों का उल्लंघन बताया गया था.

उन परीक्षणों के बाद उत्तर कोरिया ने लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का भी परीक्षण किया था.

महासचिव बान की मून ने दक्षिण कोरिया के काएसोंग औद्योगिक इलाक़े में लोगों और सामान के आवागमन पर रोक लगाए जाने पर भी चिंता जताई है.

इस इलाक़े में ज़्यादातर दक्षिण कोरियाई कंपनियाँ हैं और उनमें अधिकतर उत्तर कोरियाई नागरिक काम करते हैं.

महासचिव ने उम्मीद जताई कि इस रोक को जल्दी ही हटा लिया जाएगा.

शस्त्र व्यापार संधि का स्वागत

लोकतांत्रिक और समानता वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ अल्फ्रेड डी ज़ायस ने शस्त्र व्यापार संधि का स्वागत किया है.

शस्त्र

शस्त्र निर्माण और कारोबार दोनों पर पाबंदी की माँग की गई है

इस नई संधि में ऐसे देशों को हथियार निर्यात करने पर पाबन्दी लगाई गई है जिनके बारे में ये जानकारी हो कि वो देश इन हथियारों का इस्तेमाल नरसंहार, युद्धापराधों या मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के लिए कर सकते हैं.

अल्फ्रेड डी ज़ायस का कहना था कि विश्व को हथियारों का सिर्फ़ कारोबार ही नहीं, बल्कि इनका निर्माण ही बंद करना होगा. क्योंकि जब किसी हथियार का निर्माण कर दिया जाता है तो उसे इस्तेमाल करने की ललक बनी रहती है. और जब एक हथियार चलाने की आदत बन जाती है तो फिर उसका निर्माण भी जारी रहता है.

उनका कहना था कि जो भी कोई ऐसे लोगों को हथियार बेचता है जिसके बारे में ये मालूम है कि वो मानवाधिकारों का उल्लंघन करेंगे तो, ऐसे हथियारों से हुई मौतों की ज़िम्मेदारी हथियार बेचने वाले पर ही होती है.

इसलिए ऐसे हथियार विक्रेताओं पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में युद्धापराधों और मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों में शामिल होने का मुक़दमा चलाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि परंपरागत हथियारों के निर्माण और व्यापार से मानवीय जीवन को होने वाले भारी नुक़सान को कम करने के लिए ये शस्त्र व्यापार संधि एक महत्वपूर्ण और पहला क़दम है. स्वभाविक रूप से इस संधि से सार्थक निरस्त्रीकरण और लड़ाई झगड़ों को कम करने में भी मदद मिलेगी.

हालाँकि अल्फ्रेड डी ज़ायस ने कहा कि ये संधि अपने आप में सम्पूर्ण नहीं है क्योंकि इसके घोषणा पत्र की भाषा में बहुत से ऐसे अस्पष्ट शब्द हैं जिनके ज़रिए शस्त्र उद्योग को फ़ायदा पहुँचाया जा सकता है.

इस संधि में ग़ैर सरकारी संगठनों को हथियार बेचने पर कोई पाबंदी नहीं है. इसलिए इस संधि में जो ख़ामियाँ रह गई हैं उन्हें दूर करने के लिए एक और समझौता किया जा सकता है.