11/04/2014

एक जहाँ हो ऐसा जहाँ सब हों बराबर

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मौजूदा सदी में एक ऐसा नगरीय यानी शहरी मॉडल तैयार करने का आहवान किया गया है जिसमें ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को बराबरी का मौक़ा मिले.

कोलम्बिया के मेडलिन शहर में सोमवार को विश्व नगरीय फ़ोरम का सातवाँ सत्र शुरू हुआ जिसमें एक नया जहाँ बनाने का आहवान किया गया.

एक ऐसा जहाँ, जिसमें शहरों को ज़्यादा टिकाऊ, भागीदार, उत्पादक और समानता वाले बनाया जा सके.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इस सत्र को अपना एक रिकॉर्डेड संदेश भेजा.

इसमें उन्होंने आहवान किया कि एक ऐसा शहरी यानी नगरीय एजेंडा बनाया जाए जिसमें किसी भी इंसान को पीछे ना छोड़ दिया जाए.

बान की मून का कहना था कि दुनिया लगातार शहरी होती जा रही है. इस माहौल में टिकाऊ विकास, समान सामाजिक प्रगति, भागीदारी वाला आर्थिक विकास और मज़बूत पर्यावरण ढाँचा तैयार करने के अवसर भी पैदा हो रहे हैं.

हालाँकि बान की मून ने ये भी कहा कि इन अवसरों के बावजूद बहुत सी चुनौतियाँ भी मुँह बाएँ खड़ी हैं.

इन चुनौतियों में नगरों में बढ़ती असमानता भी एक है.

सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधियों से आहवान किया गया कि वो विकास का ऐसा मॉडल तैयार करें जिसमें सभी को तरक़्क़ी करने का मौक़ा मिले और ग़रीबी दूर करने में कामयाबी हासिल हो.

बान की मून का ये भी कहना था कि दुनिया भर में नगरीय जीवन सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आधार पर बँटा हुआ है.

लोगों को अपनी ज़िन्दगी में बेहतरी लाने के ऐसे अवसरों से वंचित रखा जाता है जो उन्हें नगरीय जीवन में आसानी से मिल सकते हैं.

उन्होंने कहा कि अत्यधिक ग़रीबी दूर करने के लिए ऐसा विकास मॉडल बेहद ज़रूरी है जिसमें सभी को फलने-फूलने का मौक़ा मिल सके.

विश्व नगरीय फ़ोरम के सातवें सत्र को शहरी जीवन की मौजूदा स्थिति पर गहन विचार विमर्श करने के लिए तो इस्तेमाल किया ही गया.

साथ ही इस अवसर को वर्ष 2016 में होने वाले विश्व हैबिटेट के तीसरे सम्मेलन की तैयारी के तौर पर भी इस्तेमाल किया गया.

रिपोर्ट प्रस्तुति – महबूब ख़ान

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