11/04/2014

सीरिया में अब क़ुदरती क़हर की आशंका

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सीरिया पिछले क़रीब तीन वर्षों से ख़ूनी संघर्ष का सामना कर रहा है. ऐसे में इस साल उसे प्राकृतिक तबाही का भी सामना करना पड़ सकता है.

हिंसक गृहयुद्ध का सामना कर रहे सीरिया में भीषण सूखे की स्थिति ने भोजन संकट को और गम्भीर बना दिया है.

ख़ासतौर से सीरिया का पूर्वोत्तर इलाक़ा भीषण सूखे का सामना कर रहा है और विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि इससे खाद्यान्न का संकट और गम्भीर हो गया है.

यह संयुक्त राष्ट्र एजेंसी सीरिया में ज़रूरतमन्दों को खाद्यान्य मुहैया करा रही है और पिछले महीने यानी मार्च 2014 में सीरिया में लगभग चालीस लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया.

एजेंसी ने आशंका जताई है कि सीरिया में अगर समुचित बारिश नहीं हुई तो सूखा पड़ने की वजह से लाखों लोगों का जीवन ख़तरे में पड़ जाएगा.

सीरिया में आमतौर पर सितम्बर से अप्रैल के बीच अच्छी बारिश का मौसम होता है और विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि इस बार औसत से आधी बारिश हुई है.

जिनेवा में विश्व खाद्य कार्यक्रम की प्रवक्ता एलिज़ाबेथ बिर्स का कहना था, “विश्व खाद्य कार्यक्रम इस बात को लेकर बहुत चिन्तित है कि सीरिया में क़रीब 65 लाख लोगों को भोजन की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में उन्हें जीवित रहने के लिए ज़रूरी खाद्यान्न सामग्री बाहरी सहायता से मुहैया कराने की ज़रूरत पड़ेगी.”

“हम इस बात को लेकर भी बहुत चिन्तित हैं कि अलेप्पो, इदलीब, हमा और पूर्वोत्तर के अन्य इलाक़ों में सूखे का ख़तरा बढ़ रहा है. औसत से आधी बारिश होने की वजह से अनाज की फ़सलों पर बुरा असर पड़ने की बड़ी आशंका है.

मंगलवार को प्रकाशित संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में सूखे का असर पड़ रहा है.

संगठन का कहना है कि सूखे की ये स्थिति ख़ासतौर से सीरिया में खेतीबाड़ी पर बहुत बुरा असर डालेगी जिससे पहले से ही अशान्ति से जूझ रहे देश में लोगों पर गहरा असर पड़ेगा. कम बारिश की वजह से गेहूँ का उत्पादन सिर्फ़ 17 से 20 लाख टन के बीच रहने की सम्भावना है जोकि उम्मीद और ज़रूरत से बहुत कम होगा.

अगर ऐसा हुआ तो भारी मात्रा में गेहूँ का आयात करना पड़ेगा.