11/04/2014

एक साल में 430,000 को मार दिया गया

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ये दुनिया एक तरफ़ तो ज़्यादा सुरक्षित और प्रगतिशील बनाने की कोशिश की जा रही है लेकिन ये देखकर किसे अफ़सोस नहीं होगा कि लाखों लोगों को हर साल मौत के मुँह में ढकेल दिया जाता है.

ये किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से नहीं बल्कि इंसान के वहशीपन की वजह से होता जिसमें वो दूसरे इंसानों की ज़िन्दगी छीनने में नहीं घबराता.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि वर्ष 2012 में दुनिया भर में क़रीब चार लाख 30 हज़ार लोगों की हत्या हुई.

वजह कुछ भी हो सकती है लेकिन ये 21 वीं सदी में बहुत गहरी चिन्ता की बात है.

संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध कार्यालय (UNODC) ने ये आँकड़े जारी किए हैं. गुरूवार को लन्दन में “Global Study on Homicide” यानी हत्याओं पर वैश्विक रिपोर्ट जारी की गई.

रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में जितनी हत्याएँ हुईं उनमें से आधे से ज़्यादा अफ्रीका और अमरीकी देशों में हुईं.

रिपोर्ट कहती है कि वैश्विक स्तर पर हर वर्ष एक लाख लोगों पर हत्याएँ होने का औसत क़रीब 6.2 है जबकि अफ्रीका में हर एक लाख में तीस लोग हत्याओं का शिकार होते हैं.

अमरीकी देशों में ये औसत संख्या प्रति एक लाख पर 26 है.

रिपोर्ट में पता चलता है कि हत्याएँ करने वाले भी ज़्यादातर पुरुष हैं और जिनकी हत्याएँ होती हैं वो भी ज़्यादातर पुरुष ही हैं.

रिपोर्ट ये भी कहती है कि दुनिया भर में हर वर्ष जितनी हत्याएँ होती हैं, उनमें से 15 प्रतिशत हत्याओं का कारण घरेलू हिंसा होती हैं.

UNODC में नीति विश्लेषण और सार्वजनिक मामलों के विभाग की निदेशक ज्याँ ल्यूक लेमाहियू का कहना है कि इस रिपोर्ट के नतीजों पर गम्भीर होने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा कि हिंसा और हिंसक प्रवृत्ति के ख़िलाफ़ सभी को मिलकर काम करना होगा ताकि विकास और सुरक्षा पर ज़्यादा ध्यान दिया जा सके.

संगठन की ताज़ा रिपोर्ट कहती है कि दुनिया भर में जितनी हत्याएँ होती हैं उनमें हत्यारों को सज़ा होने का औसत प्रतिशत 43 है यानी हर 100 हत्याओं पर 43 लोगों को सज़ाएँ हो पाती हैं.

लेकिन तमाम क्षेत्रों में हत्यारों को सज़ाएं होने का औसत बराबर नहीं है कहीं हत्यारे छूट जाते हैं तो कहीं न्याय का शिकंजा अच्छी तरह कसा रहता है.

यूरोप में हत्यारों को सज़ा होने का औसत प्रतिशत 81 है यानी 100 में से 81 हत्यारों को क़ानून के दायरे में जकड़ लिया जाता है.

जबकि एशिया में औसतन सिर्फ़ 48 प्रतिशत हत्यारों को ही न्याय के कटघरे में लाया जाता है. अमरीकी देशों में तो ये औसत और भी कम है जहाँ सिर्फ़ 24 प्रतिशत हत्यारे क़ानून की पकड़ में आ पाते हैं.

रिपोर्ट प्रस्तुति – महबूब ख़ान

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