3/04/2014

डेंगू, मलेरिया पर यूरोप में अलर्ट

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भारत और पाकिस्तान जैसे दक्षिण एशियाई देशों में तो अक्सर मलेरिया और डेंगू लोगों की जान लील लेते हैं लेकिन अब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मच्छर और मक्खियों जैसे कीड़ों-मकौड़ों द्वारा फैलने वाली बीमारियों के मद्देनज़र यूरोपीय देशों में भी अलर्ट जारी किया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आगाह करते हुए कहा है कि दुनिया भर में फैले कारोबारों, सैलानियों की यात्राओं, बढ़ते शहरीकरण और मौसम के बदलते मिज़ाज की वजह से यूरोपीय देशों में भी मक्खी-मच्छर जैसे कीड़े-मकौड़ों से होने वाली बीमारियाँ फैलने का बहुत ख़तरा है.

यूरोप के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की इकाई ने सात अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर ये चेतावनी जारी की है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यूरोपीय देशों में हर वर्ष क़रीब 77 हज़ार लोग ऐसी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं जो मच्छरों, रेत में होने वाली मक्खियों और पिस्सुओं के काटने से होती हैं.

संगठन का ये भी कहना है कि वर्ष 1990 से 2010 के बीच के दौरान इस तरह के कीड़े-मकौड़ों ने यूरोपीय देशों में 15 लाख से भी ज़्यादा लोगों में बीमारियाँ फैला दी थीं.

वर्ष 2013 में यूरोपीय देशों में मलेरिया के पाँच हज़ार मामले दर्ज किए गए थे.

ये आँकड़े इसलिए चिन्ताजनक थे क्योंकि यूरोपीय देशों में स्थानीय तौर पर होने वाली मलेरिया की बीमारी को जड़ से मिटाने में ख़ासी प्रगति हो चुकी थी.

डेंगू भी दुनिया भर में ऐसी तेज़ी से फैलने वाली बीमारी है जो कीड़े-मकौड़ों के ज़रिए होती है और ये बीमारी यूरोपीय देशों में साठ साल के बाद फिर से नज़र आने लगी है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इंसानों में होने वाली इस तरह की बीमारियों को शुरूआती अवस्था में ही भाँपने और इन बीमारियों को फैलाने वाले कीड़े-मकौड़ों की निगरानी करके उन पर नियंत्रण पाने के प्रयासों की बदौलत इन बीमारियों पर काफ़ी हद तक क़ाबू पाया जा सकता है.

यूरोप के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की इकाई का क्षेत्रीय कार्यालय डेनमार्क के शहर कोपनहेगन में है.

ये इकाई 53 देशों के लिए सक्रिय है जिनकी आबादी क़रीब 90 करोड़ है.

रिपोर्ट प्रस्तुति – महबूब ख़ान