3/04/2014

व्हेल विवाद पर फ़ैसला

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हेग स्थित संयुक्त राष्ट्र अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय ने जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्हेल के शिकार पर चले आ रहे विवाद पर फ़ैसला सुना दिया है.

इस फ़ैसले में जापान को आदेश दिया गया है कि वो अंटार्कटिक में व्हेल के शिकार से सम्बन्धित अपनी तमाम गतिविधियाँ फिलहाल रोक दे.

ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2010 में जापान के ख़िलाफ़ अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय में ये कहते हुए मुक़दमा दायर किया था कि जापान व्हेल के शिकार से सम्बन्धित अन्तरराष्ट्रीय क़ानून तोड़ रहा है.

ऑस्ट्रेलिया ने ये भी कहा था कि जापान व्हेल के शिकार सम्बन्धित अपनी गतिविधियों को वैज्ञानिक आधार पर जायज़ नहीं ठहरा सकता.

ऑस्ट्रेलिया ने ये भी आरोप लगाया था कि जापान जैपरा-2 (JAPRA-2) नाम से व्हेल के शिकार का एक बहुत बड़ा कार्यक्रम चला रहा है.

ये कार्यक्रम व्हेल के शिकार को नियमित करने वाली अन्ततराष्ट्रीय सन्धि (ICRW) के अनेक प्रावधानों का उल्लंघन करता है.

जापान कहता रहा है कि वो जैपरा-2 के तहत वैज्ञानिक शोध और अनुसन्धान के लिए व्हेल का शिकार करता है.

इस मुक़दमे पर 16 जजों के एक पीठ ने सुनवाई की जिनमें से 12 ने ये फ़ैसला सुनाया कि जापान व्हेल के शिकार से सम्बन्धित अन्तरराष्ट्रीय सन्धि यानी ICRW के तीन प्रावधानों का उल्लंघन कर रहा है.

इस फ़ैसले में जापान को आदेश दिया गया है कि वो जैपरा-2 के तहत व्हेल से सम्बन्धित तमाम गतिविधियों को फिलहाल रोक दे.

इनमें व्हेल के शिकार का लाइसेंस देना या व्हेल को अनुसन्धान या किसी और काम के लिए पकड़ने पर पाबन्दी भी शामिल है.

न्यायालय ने जापान को ये भी आदेश दिया है कि जैपरा-2 कार्यक्रम के तहत व्हेल के शिकार के लिए किसी भी तरह के नए परमिट जारी ना करे.

न्यायालय ने व्यापक जाँच-पड़ताल के बाद पाया कि जैपरा-2 कार्यक्रम के कम से कम तीन प्रावधान इस बारे में सन्देह पैदा करते हैं कि क्या ये कार्यक्रम सचमुच वैज्ञानिक शोध और अनुसन्धान के लिए चलाया जा रहा है.

अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख न्यायिक संस्था है जो विभिन्न देशों के बीच अन्तरराष्ट्रीय विवादों के निपटारे की ज़िम्मेदारी सम्भालती है.

ये न्यायालय विभिन्न देशों के बीच चले विवादों पर क़ानूनी दायरे में सुनवाई के बाद अपनी राय देता है.

ये विवाद संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न संगठनों और एजेंसियों द्वारा इस न्यायालय को सौंपे जाते हैं.

अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय के पास अपने फ़ैसलों को लागू कराने की भी ताक़त है और इसके फ़ैसलों के ख़िलाफ़ कोई अपील भी नहीं की जा सकती है.

रिपोर्ट प्रस्तुति – महबूब ख़ान

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