3/04/2014

मौसम के मिज़ाज पर तैयारी अधूरी

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मौसम के बदलते मिज़ाज यानी जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए अभी दुनिया पूरी तरह तैयार नहीं है क्योंकि ये प्रभाव बहुत गम्भीर, व्यापक और ऐसे हैं जिन्हें वापिस नहीं किया जा सकता.

जलवायु परिवर्तन पर अन्तरराष्ट्रीय पैनल यानी IPCC ने अपनी एक ताज़ा रिपोर्ट में ये चेतावनी दी है.

रिपोर्ट आगाह करते हुए ये भी कहती है कि जलवायु परिवर्तन के ख़तरों का सामना करने के लिए दुनिया की तैयारी आमतौर पर मुक़म्मल नहीं है.

रिपोर्ट ये भी निष्कर्ष पेश करती है कि जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाले ख़तरों का सामना करने के लिए मौक़े मौजूद हैं लेकिन पृथ्वी का तापमान अगर इसी रफ़्तार से बढ़ता रहा तो उन ख़तरों का सामना करना ही मुश्किल हो जाएगा.

आई पी सी सी के एक कार्यकारी दल के सह अध्यक्ष, वैज्ञानिक और शोधकर्ता क्रिस फ़ील्ड का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को समझना और ख़तरों का सामना करने के लिए तैयार रहने की नीयत कर लें तो अवसरों की कमी नहीं है.

क्रिस फ़ीर्ड का कहना था, “मेरी राय पूछें तो मैंने रिपोर्ट पढ़ने के बाद पाया कि उम्मीद बरक़रार रखने के बहुत से कारण मौजूद हैं.”

“जलवायु परिवर्तन का असरदार तरीक़े से मुक़ाबला करने के प्रयास करके एक ऐसी दुनिया बनाई जा सकती है जिसमें रचनात्मकता और नई सोच पर ज़्यादा ध्यान दिया जाए, जिसमें मुश्किल समस्याओं को हल करने के लिए बढ़चढ़कर काम किया जाए.”

क्रिस फ़ील्ड का कहना था कि जलवायु परिवर्तन एक गम्भीर मुद्दा है. यूँ भी कह सकते हैं कि जलवायु परिवर्तन मौजूदा यानी 21वीं सदी का ही एक मुख्य मुद्दा बन चुका है, लेकिन ये एक ऐसा मुद्दा भी है जहाँ हम अगर अक़्लमन्दी से काम लें तो गम्भीर चुनौतियों का सामना होशियारी से किया जा सकता है.

आई पी सी सी के वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के असर खेती-बाड़ी, इंसानों के स्वास्थ्य, भूमि, समुद्र, जल आपूर्ति और बहुत से लोगों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी पर पहले ही देखा जा रहा है.

दुनिया भर के सैकड़ों वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और हज़ारों समीक्षकों ने इस रिपोर्ट को तैयार करने में योगदान किया है.

रिपोर्ट प्रस्तुति – महबूब ख़ान