3/04/2014

बुज़ुर्गों का ख़याल रखने की ज़रूरत

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 संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने बुज़ुर्गों के जीवन और अधिकारों के बारे में गहन विचार विमर्श किया है.

मंगलवार को परिषद ने बुज़ुर्गों की ज़िन्दगी विषय पर एक विशेष विचार गोष्ठि का आयोजन किया.

ये सामाजिक फ़ोरम एक ऐसी वार्षिक बैठक होती है जिसमें बुज़ुर्गों से जुड़े तमाम मुद्दों पर खुले रूप में विचार किया जाता है जिसमें सभी को अपनी राय रखने का मौक़ा मिलता है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को सिविल सोसायटी, ऐसे ग़ैर-सरकारी और तमाम अन्य संगठनों के पदाधिकारियों से बातचीत करने का मौक़ा मिलता है जो बुज़ुर्गों की बेहतरी के लिए ज़मीनी स्तर पर काम करते हैं.

इस वर्ष ये फ़ोरम 1 से 3 अप्रैल तक आयोजत किया गया.

संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार दुनिया भर में इस समय लगभग 70 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 60 वर्ष से ज़्यादा है.

वर्ष 2050 तक 60 वर्ष से ज़्यादा उम्र के लोगों की संख्या दो अरब को पार कर जाएगी जो कुल आबादी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होगा.

दुनिया भर में बुज़ुर्गों के मानवाधिकारों पर पेश की गई महासचिव की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया और अफ्रीका क्षेत्रों में बुज़ुर्गों की संख्या ज़्यादा होगी.

इस पहलू को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट ध्यान दिलाती है कि बुज़ुर्गों के सामने आने वाली चुनौतियों पर ख़ास ध्यान दिलाने की ज़रूरत है.

रिपोर्ट ये भी कहती है कि इसी के बराबर अहम पहलू ये भी है कि अगर बुज़ुर्गों की समुचित देखभाल सुनिश्चित की जाए तो वो समाज को अपना योगदान जारी रख सकते हैं.

रिपोर्ट निष्कर्ष पेश करते हुए कहती है कि इस क्षेत्र में जो भी प्रयास किए जाएँ, उसकी धुरी में मानवाधिकार हैं जिनका ध्यान रखते हुए उम्मीद के मुताबिक़ कामयाबी हासिल की जा सकती है.

रिपोर्ट प्रस्तुति – महबूब ख़ान

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