28/03/2014

वायु प्रदूषण से 70 लाख मौतें

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दुनिया भर में बढ़ते औद्योगीकरण, मोटर वाहनों की बढ़ती संख्या और ख़राब ईंधन के इस्तेमाल की वजह से वर्ष 2012 में लगभग 70 लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि पहले के अनुमानों के मुक़ाबले ये मृतक संख्या लगभग दो गुना रही.

संगठन का ये भी कहना है कि ये संख्या दर्शाती है कि दुनिया में एक साल में जितनी मौतें होती हैं, उनमें हर आठ में से एक मौत वायु प्रदूषण की वजह से होती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है कि इन आंकड़ों से ये साबित होता है कि अब दुनिया भर में वायु प्रदूषण पर्यावरण से जुड़ा सबसे बड़ा स्वास्थ्य ख़तरा बन चुका है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन में सार्वजनिक स्वास्थ्य की निदेशक डॉक्टर मारिया नैरा कहती हैं कि वायु प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य को ख़तरनाक़ हद तक प्रभावित करता है.

डॉक्टर मारिया नीरा कहना था, "वायु प्रदूषण अब सबसे बड़ा पर्यावरण ख़तरा बन चुका है. ये ख़तरा विकसित, विकासशील और ग़रीब सभी देशों में हर किसी को किसी ना किसी रूप में प्रभावित ज़रूर कर रहा है."

"इसलिए इस मुद्दे पर गम्भीरता से सोचा जाना बहुत ज़रूरी है. अब ये सिर्फ़ अमीर यानी विकसित देशों की ही समस्या नहीं बची है. ये समस्या अमीर और ग़रीब सभी देशों पर समान रूप से असर डाल रही है."

नए आँकड़ों में जानकारी दी गई है कि दीवारों के भीतर और खुले स्थानों पर किस तरह से वायु प्रदूषण ख़तरनाक रूप ले चुका है.

लोग जब इस वायु प्रदूषण में साँस लेते हैं तो दिल की बीमारियाँ हो जाती हैं, दिल के दौरे भी पड़ने लगते है.

ताज़ा आँकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण पूर्वी एशिया और पश्चिमी प्रशान्त क्षेत्रों के कम और मध्यम आय वाले देशों में सबसे ज़्यादा वायु प्रदूषण पाया गया है.

इन्हीं देशों में लगभग 60 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण की वजह से हुई है.

रिपोर्ट प्रस्तुति – महबूब ख़ान