28/03/2014

बढ़ता पारा बढ़ती चिन्ता

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विश्व मौसम संगठन यानी WMO ने कहा है कि दुनिया भर का तापमान यानी ग्लोबल वॉर्मिंग लगातार बढ़ रहा है. वर्ष 2013 में भी ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ी और ये वर्ष लगातार छटा सबसे ज़्यादा गरम वर्ष दर्ज किया गया.

संगठन का कहना है कि वर्ष 2013 के दौरान बिगड़े मौसम की बहुत सी गम्भीर घटनाएँ हुईं जिनमें गरम हवाएँ, तूफ़ान, समुद्री बाढ़ शामिल रहे जिन्हें मानव की जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी गतिविधियों के दुष्परिणाम के रूप में देखा गया.

दक्षिणी गोलार्द्ध के अनेक हिस्सों में तापमान ख़ासतौर पर गरम रहा. ऑस्ट्रेलिया में वर्ष 2013 सबसे ज़्यादा गरम रहा और दूसरे स्थान पर अर्जेंटीना कोबसे ज़्यादा गरमी का सामना करना पड़ा.

उत्तरी गोलार्द्ध में हालाँकि बसन्त के मौसम में अच्छी ठंड रही लेकिन ब्रिटेन और नीदरलैंड सहित अनेक देशों में बाढ़ और तूफ़ानों की वजह से हालात बहुत चिन्तित रहे.

अमरीका के अनेक हिस्सों में लगातार सूखा पड़ रहा है जहाँ कैलीफ़ोर्निया में सबसे ज़्यादा सूखा रहा. वर्ष 1895 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद ये सबसे ज़्यादा सूखा वर्ष दर्ज किया गया.

विश्व मौसम संगठन का कहना है कि वर्ष 2013 में कुल 94 तूफ़ान आए जिनमें नवम्बर में फ़िलीपीन्स में आए समुद्री तूफ़ान हैयान ने बहुत तबाही मचाई.

इस तूफ़ान को अभी तक के रिकॉर्ड में सबसे ज़्यादा ताक़तवर क़रार दिया गया.

विश्व मौसम संगठन के महासचिव माइकल जर्राउड का कहना था, "अब भी देर नहीं हुई है और हम जलवायु परिवर्तन के परिणामों के अनुरूप ख़ुद को ढाल सकते हैं."

"पृथ्वी का जितना तापमान बढ़ेगा, उतना ही मनुष्य जाति को उसके अनुरूप ख़ुद को ढालने की ज़रूरत पड़ेगी. हालाँकि ये बहुत महंगा सौदा होगा और ख़ासतौर पर कम विकसित देशों पर इसका ज़्यादा नुक़सान होगा."

उन्होंने कहा कि विकासशील और ग़रीब देशों के पास जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों का असर बर्दाश्त करने के लिए शायद पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं होंगे.

संगठन का कहना है कि वैसे तो तूफ़ानों और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के बारे में पहले से ही सूचनाएँ इकट्ठा करके उन्हें प्रसारित करना पहले के मुक़ाबले बहुत आसान हो गया है.

लेकिन इन क़ुदरती मुश्किलों का सामना करने के लिए पहले से ही तैयारियाँ करने की तरफ़ और ज़्यादा ध्यान देना होगा.

समय रहते चेतावनी देने की प्रणालियों को और सक्षम बनाना होगा.

साथ ही जान-माल के नुक़सान को कम करने के लिए इन आपदाओं से निपटने की रणनीतियों को बहुमुखी बनाना होगा.

रिपोर्ट प्रस्तुति – महबूब ख़ान