21/03/2014

भूख और हताशा की जकड़ में सीरियाई

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सीरिया में मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जाँच करने वाले अन्तरराष्ट्रीय आयोग ने कहा है कि सीरिया के उन गाँवों और क़स्बों में बच्चे भूख से मर रहे हैं जहाँ पर या तो सरकारी सेनाओं का क़ब्ज़ा है या फिर विद्रोहियों ने उन्हें क़ब्ज़े में ले लिया है.

आयोग का कहना है कि इन हालात की वजह से बहुत से सीरियाई अपने को बेबस और बेसहारा महसूस करने लगे हैं जिन्हें निकट भविष्य में शान्ति कहीं नज़र नहीं आती.

आयोग ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को सौंपी गई अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि सीरियाई लोगों में बिल्कुल हताशा और नाउम्मीद घर कर गई है क्योंकि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के पास सीरियाई संकट समाप्त करने के कोई उपाय नहीं नज़र आते हैं.

आयोग का कहना है कि सीरियाई समस्या का कोई राजनीतिक और सर्वसम्मत हल निकालने के लिए सभी पक्षों को आपसी समझदारी और बहादुरी दिखानी होगी और इसमें प्रभावशाली देशों को भी अपना सहयोग देना चाहिए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि जो देश सीरिया के विभिन्न गुटों पर अपना प्रभाव रखते हैं वो अपने इस प्रभाव का इस्तेमाल लड़ाई रुकवाने के लिए करें. साथ ही सीरिया में लड़ाई में शामिल गुटों को हथियार देना बन्द करें क्योंकि इन हथियारों का इस्तेमाल लोगों के ख़िलाफ़ किया जा रहा है और ये साफ़तौर पर युद्धापराध या मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के दायरे में आता है.

सीरियाई अरब गणराज्य के लिए बनाए गए इस आयोग के अध्यक्ष सर्गियो पिन्हीरो का कहना था, “हम अपने कमरों में यूँ ही ख़ामोश नहीं बैठे रह सकते. सीरिया की सड़कों पर जबकि मासूम लोगों का ख़ून बह रहा है, हम अपना वक़्त सिर्फ़ रिपोर्टें लिखने और भाषण देने में नहीं गँवा सकते.

“सीरियाई संकट का कोई राजनैतिक और सर्वसम्मत समाधान बिना और देरी के निकाला जाना बेहद ज़रूरी है. इसके लिए सभी पक्षों को दरियादिली और बहादुरी दिखानी होगी और तमाम असरदार देशों को भी इसमें सहयोग देना होगा. हमने इस रिपोर्ट में लगभग 2700 लोगों से बातचीत की है और ढेर सारे दस्तावेज़ जुटाए हैं जिनसे सीरिया के हालात की गम्भीरता और भयावहता का अन्दाज़ा लगता है. अपराध और अपराधियों के बारे में भरपूर जानकारी उपलब्ध है लेकिन इन हालात में सबसे ज़्यादा ज़रूरत ऐसे प्रयासों और व्यवस्था की है जिसमें गतिविधियों के लिए जवाबदेही और इंसाफ़ क़ायम किया जा सके.”

सर्गियो पिन्हीरो ने कहा, हमने ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं, सैनिक इकाइयों, सुरक्षा एजेंसियों, सशस्त्र गुटों और बटालियनों के बारे में जानकारी इकट्ठा की है जो मानवाधिकार उल्लंघन और अपराधों के लिए ज़िम्मेदार हैं. सीरिया में जो कुछ भी हो रहा है, उसके बारे में कोई भी अपनी आँखें मूँदकर मूकदर्शक नहीं बने रह सकता.”

उन्होंने कहा कि जो पक्ष ये समझते हैं कि सीरिया संकट का कोई सैनिक हल निकल सकता है या फिर जो पक्ष ये समझते हैं कि सीरिया में कई पक्षों की लड़ाई लड़ी जा रही है, वे पक्ष एक राजनैतिक संकट की सम्भावनाओं को धूमिल कर रहे हैं.

आयोग का कहना है कि लगभग 90 लाख सीरियाई लोगों को इस लड़ाई की वजह से बेघर होना पड़ा है. ये संख्या देश की कुल आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा है.