21/03/2014

अफ़ग़ान चुनाव में महिला भागीदारी ज़रूरी

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अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति पद के चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बहुत ज़रूरी है ताकि चुनावों को सभी की भागीदारी वाला और भरोसेमन्द क़रार दिया जा सके.

ये कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में महासचिव के उप प्रतिनिधि निकोलस हेयसम का. राजधानी काबुल में बुधवार को सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात के बाद उन्होंने ये बयान दिया है.

अफ़ग़ानिस्तान में पाँच अप्रैल को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं. निकोलस हेयसम ने कहा कि इन चुनावों में महिलाओं की भागीदारी ना सिर्फ़ देश के लिए अहम है बल्कि ख़ुद महिलाओं के लिए भी बहुत अहम और ज़रूरी है.

निकोलस हेयसम का कहना था, “हम समझते हैं कि महिलाओं के हाथ में बैलट यानी वोट एक हथियार के तौर पर है जिसके ज़रिए अपनी राय को खुले तौर पर ज़ाहिर किया जाता है. इसी वोट के ज़रिए उनके मुद्दों और समस्याओं के प्रति सरकार का ध्यान खींचा जाता है.”

“मैं ज़ोर देकर कहना चाहता हूँ कि जब हम चुनावों में महिलाओं की भागीदारी की बात करते हैं तो सिर्फ़ मतदाता के रूप में ही नहीं, बल्कि चुनाव लड़ने में भी उनकी भरपूर भागीदारी होनी चाहिए.”

उन्होंने कहा कि “साथ ही मतदान मशीनरी में भी महिलाओं को हिस्सा बनाया जाए, उनके समुदायों में भी उनकी बात सुनी जाए. और मतदान केन्द्रों में भी कर्मचारियों के रूप में भी उनकी राय का वज़न होना चाहिए.”

निकोलस हेयमस ने कहा कि ये देखकर काफ़ी तसल्ली होती है कि देश में जितने नए मतदाताओं ने अपना पंजीकरण कराया है उनमें 35 प्रतिशत महिलाएँ हैं.

निकोलस हेयसम ने इस पर ख़ुशी जताई कि राष्ट्रपति चुनाव के साथ ही होने वाले प्रान्तीय परिषदों के चुनावों में 300 से ज़्यादा महिलाएँ भी उम्मीदवार होंगी.

उप राष्ट्रपति पद के चुनाव में भी तीन महिलाएँ उम्मीदवार होंगी.

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