21/03/2014

किशोर अपराध की उम्र का दायरा

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संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यानी यूनीसेफ़ ने ईरान से आग्रह किया है कि वो किशोरों के लिए आपराधिक ज़िम्मेदारी तय करने की न्यूनतम उम्र बढ़ा दे.

ईरान में इस समय व्यवस्था है कि लड़कियों को 9 वर्ष की उम्र आपराध के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है. लड़कों के लिए ये उम्र सीमा 15 वर्ष है.

हालाँकि ईरान सरकार ने बच्चों को मौत की सज़ा से सुरक्षित रखने के लिए इस्लामी दंड प्रक्रिया संहिता में हाल ही में संशोधन किए हैं जिसका यूनीसेफ़ ने स्वागत किया है.

यूनीसेफ़ की एक वरिष्ठ पदाधिकारी निकोलेट मूडी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को सम्बोधित करते हुए ईरान सरकार से अनुरोध किया कि वो आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता में और संशोधन करे ताकि किशोरों पर अपराध तय करने की उम्र बढ़ा दी जाए.

उन्होंने कहा कि यूनीसेफ़ इस्लामी गणराज्य ईरान से ये भी अनुरोध करता है कि ऐसे मामलों की भी समीक्षा की जाए जिनमें आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन किए जाने से पहले ही बच्चों को मौत की सज़ा सुना दी गई थी.

इस अनुरोध में कहा गया है कि इन बच्चों को भी आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता में समीक्षा के बाद किए गए बदलावों का लाभ उठाने का मौक़ा मिलना चाहिए.

ग़ौरतलब है कि बच्चों के अधिकारों के बारे में हुए अन्तरराष्ट्रीय सन्धियों में बच्चों को मौत की सज़ा दिया जाना प्रतिबन्धित है. इन सम्मेलनों और सन्धियों में बच्चों के नागरिक, राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक अधिकारों का भी वर्णन किया गया है.

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