14/03/2014

यूक्रेन ने कहा बातचीत से ही निकले हल

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यूक्रेन के प्रधानमंत्री अरसेनिए यत्सेन्युक ने कहा है कि अब भी कोई देर नहीं हुई है और उनके देश में पैदा हुआ संकट शान्तिपूर्ण तरीक़े से सुलझाया जा सकता है.

ग़ौरतलब है कि रूसी संसद ने यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र को रूस में मिलाने के पक्ष में मतदान किया था जिसके बाद रूस ने क्रीमिया में अपनी सेनाएँ तैनात कर दी हैं.

यूक्रेन के प्रधानमंत्री अरसेनिए यत्सेन्युक ने गुरूवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि यूक्रेन को रूस के साथ सार्थक बातचीत करने का मौक़ा मिल जाए तो दोनों देश अच्छे दोस्त बनकर रह सकते हैं.

उन्होंने कहा कि रूस ने ऐसे बहुत से समझौते और संधियाँ तोड़ी हैं जो दोनों देशों के बीच हुए थे और जिनका अन्तरराष्ट्रीय वजूद भी था.

यूक्रेन के प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरे देश पर एक पड़ोसी देश का ही सैनिक हमला हुआ है और वो देश सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्यों में से एक है. इस सैनिक हमले की कोई वजह और आधार नहीं है.”

“21वीं सदी में ऐसा हमला बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता. आज के दौर में कोई भी मतभेद या संकट टैंकों, बन्दूकों, तोपों और किसी अन्य देश की ज़मीन पर सैनिकों के बूटों के शोर के ज़रिए नहीं सुलझाया जा सकता.”

उन्होंने रूस से आग्रह किया कि वो यूक्रेन से अपनी सेनाएँ हटा ले और शान्तूपूर्ण हल निकालने के लिए बातचीत शुरू करे.

अपनी इस अपील में उन्होंने ये भी ध्यान दिलाया कि यूक्रेन ने अपने परमाणु हथियार ये आश्वासन मिलने पर ख़त्म कर दिए थे कि उसकी सीमाओं, उसकी आज़ादी और सम्प्रभुता को नहीं छेड़ा जाएगा.

अरसेनिए यत्सेन्युक ने कहा कि क्रीमिया में रूस की सैनिक दख़लअन्दाज़ी की वजह से अन्तरराष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा पैदा हो सकता है और परमाणु हथियार फैलने से रोकने के प्रयासों को भी धक्का पहुँच सकता है.

उन्होंने कहा कि यूक्रेन में रूस की सैनिक कार्रवाई की वजह से ऐसे हालात पैदा हो गए हैं कि भविष्य में देशों को परमाणु हथियार बनाने से रोकने पर राज़ी करने में बहुत मुश्किल आ सकती हैं.