14/03/2014

सिविल सोसायटी के लिए जगह सिमटी

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संयुक्त राष्ट्र की एक वरिष्ठ मानवाधिकार पदाधिकारी मार्गरेट सेकाग्या ने चिन्ता जताते हुए कहा है कि दुनिया भर के अनेक हिस्सों में सिविल सोसायटी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए अपना काम करना मुश्किल ही नहीं बल्कि ख़तरनाक भी हो गया है.

दुनिया भर में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की स्थिति पर विशेष दूत मार्गरेट सेकाग्या ने मानवाधिकार परिषद के सामने अपनी अन्तिम रिपोर्ट पेश की है.

मार्गरेट सेकाग्या ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अपने कार्यकाल में उन्होंने देखा है कि सिविल सोसायटी और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए सहनशीलता कम हुई और उनके लिए अपना काम करने की जगह भी सिमटी है.

उन्होंने ये भी कहा कि मानवाधिकारों के लिए काम करने वालों की आवाज़ दबाने और ख़ामोश करने के लिए बहुत ही चालाक़ तरीक़े निकाल लिए गए हैं और अक्सर इसमें न्यायिक संस्थाओं का भी दुरुपयोग किया जाता है.

मार्गरेट सेकाग्या का कहना था, “मानवाधिकारों की रक्षा करने वालों और उनके परिवारों को अक्सर डराया-धमकाया जाता है, परेशान किया जाता है, उनकी गतिविधियों पर नज़र रखी जाती है, उन पर हमला किया जाता है, उन्हें अक्सर गिरफ़्तार भी कर लिया जाता है और उन्हें अपराधियों की श्रेणी में रख दिया जाता है.”

“इतना ही नहीं, जेलों में उनके साथ अमानवीय बर्ताव किया जाता है और उन्हें प्रताड़ित भी किया जाता है. अक्सर बल पूर्वक तरीक़े से ग़ायब कर दिया जाता है और कभी-कभी तो बिल्कुल जान से ही मार दिया जाता है. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह के बर्ताव में सरकारी और ग़ैरसरकारी दोनों ही तरह के तत्वों का हाथ होता है. “

उन्होंने कहा कि बहुत ही अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि दुनिया भर के अनेक हिस्सों में इस तरह के ग़ैरक़ानूनी काम करने वालों को क़ानून का कोई डर नहीं होता क्योंकि उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई ही नहीं हो पाती है.

मार्गरेट सेकाग्या ने चिन्ता जताते हुए आगाह किया कि इसी तरह का चलन बिना किसी डर के जारी रहा तो इससे मानवाधिकारों के लिए काम करने वालों का शारीरिक और मनोवैज्ञानिक सम्मान और मनोबल ख़तरे में पड़ जाएगा.

उन्होंने ये भी कहा कि इस तरह के माहौल से मानवाधिकारों की हिफ़ाज़त के लिए काम करने वालों के लिए डर का माहौल बन जाएगा और समूचे समाज में ही डर फैल जाएगा.

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