7/03/2014

खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में उछाल

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संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन – एफ़ ए ओ ने कहा है कि फ़रवरी महीने में अनेक देशों में ख़राब मौसम, बढ़ती माँग और सुरक्षा चिन्ताओं के मद्देनज़र विश्व भर में खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में उछाल आया है.

संगठन का कहना है कि फ़रवरी महीने में खाद्य पदार्थों के मूल्य सूचकांक में 2.6 फ़ीसदी उछाल आया है जोकि वर्ष 2012 के मध्य के बाद सबसे ज़्यादा वृद्धि रही.

चीनी, तेल, दालें और दुग्ध उत्पादों की क़ीमतों में जनवरी के बाद से ख़ासी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है जबकि गेहूँ और मक्का की क़ीमतों में रूस और यूक्रेन के बीच पैदा हुए तनाव के मद्देनज़र उछाल आया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि सीरिया, यमन, दक्षिणी सूडान और मध्य अफ्रीकी गणराज्य जैसे देशों में हालात ख़राब होने की वजह से खाद्य पदार्थों की क़िल्लत और असुरक्षा की स्थिति बनी हुई है जिससे भी खाद्य पदार्थों की क़ीमतों पर असर पड़ा है.

खाद्य और कृषि संगठन में वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों का हालाँकि ये भी कहना है कि विश्व स्तर पर खाद्य पदार्थों की क़ीमतों में आए इस उछाल की वजह से स्थानीय बाज़ारों में मूल्य वृद्धि होने की ज़्यादा सम्भावना नहीं है.

एक तथ्य ये भी है कि पिछले वर्ष यानी 2013 में आमतौर पर फ़सलें अच्छी रही थीं और खाद्य पदार्थों का भंडार काफ़ी बड़ी मात्रा में रहा है.

इसलिए पिछले वर्ष का ये भंडारण इस वर्ष यानी 2014 में काम आएगा जिससे क़ीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है.

संगठन का ये भी कहना है कि इस वर्ष यानी 2014 में भी अच्छी फ़सलें होने की उम्मीदें जताई गई हैं जिससे अनेक दक्षिणी अफ्रीकी देशों में कुछ सुधार भी आएगा.

इन देशों में पिछले वर्ष फ़सलें ज़्यादा अच्छी नहीं रही थीं. लेकिन मक्का की कम आपूर्ति और अन्य खाद्य पदार्थों की बढ़ती क़ीमतों की वजह से अनेक देशों में उपभोक्ताओं पर ख़ासा असर भी दिख सकता है.

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