7/03/2014

युवा चाहतें और ज़रूरतें मांगती हैं मौक़ा

सुनिए /

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष जॉन ऐशे ने कहा है कि दुनिया भर के युवा अच्छी तरह जानते हैं कि उनकी चाहतें और ज़रूरतें क्या हैं.

बात सिर्फ़ इतनी सी है कि उन्हें अपनी प्रतिभाएँ निखारने का भरपूर मौक़ा मिलना चाहिए.

जॉन ऐशे ने वर्ष 2015 के बाद के समय के लिए तैयार किए जाने वाले विकास एजेंडा पर महिलाओं, युवाओं और सिविल सोसायटी के योगदान पर आयोजित एक समारोह में ये विचार रखे.

विश्व नेताओं ने वर्ष 2000 में जो सहस्राब्दि विकास लक्ष्य तय किए थे उन्हें पूरा करने की समय सीमा 2015 में पूरी हो रही है.

इन विकास लक्ष्यों में ग़रीबी को ख़त्म करना और महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता को बढ़ावा देना प्रमुख लक्ष्य रहे हैं. जॉन ऐशे ने कहा कि दुनिया के लगभग एक अरब 80 करोड़ किशोर और युवा पूरी दुनिया के लिए अनमोल धरोहर हैं.

राजदूत जॉन ऐशे का कहना था, "इन किशोरों और युवाओं को अपनी प्रतिभाएँ निखारने और अपनी योग्यता का भरपूर फ़ायदा उठाने का पूरा मौक़ा नहीं मिल पाता है. इसकी वजह बेरोज़गारी या शिक्षा के समुचित अवसर नहीं मिल पाना भी हो सकता है. या फिर बहुत से किशोर और युवा बीमारियों में घिर जाते हैं और कुछ की कम उम्र में ही शादी कर दी जाती है."

"इन सब समस्याओं के बावजूद तसल्ली की बात ये है कि ये किशोर और युवा अपनी चाहतों और ज़रूरतों से पूरी तरह वाक़िफ़ हैं. उन्हें क्या चाहिए – अच्छी शिक्षा और अच्छी स्वास्थ्य सेवा, रोज़गार के समुचित अवसर और तमाम तरह के शोषण से छुटकारा."

उन्होंने कहा कि  साथ ही ऐसी तमाम बाधाओं को दूर करना भी बहुत ज़रूरी है जो एक खुली और पारदर्शी शासन व्यवस्था में किशोरों और युवाओं की भागीदारी में रोड़े अटकाती है.

जॉन ऐशे ने कहा कि पूरी दुनिया में किशोरों और युवाओं ने ये करके दिखाया है कि वो किस तरह से सामाजिक और राजनैतिक आन्दोलनों पर अपनी छाप छोड़ सकते हैं.

इसके लिए मध्य पूर्व यानी अरब देशों, पूर्वी यूरोप, लातीनी अमरीका और अफ्रीकी देशों की मिसाल दी जा सकती है जहाँ हाल के वर्षों में बदलाव की बयार शुरू करने में युवाओं ने निर्णायक भूमिका निभाई है.

Loading the player ...

कनेक्ट