7/03/2014

36 करोड़ लोगों के कान बेअसर

सुनिए /

तमाम देशों से कहा गया है कि वो लोगों के कानों को नुक़सान पहुँचने और उनकी सुनने की क्षमता पर असर डालने वाले कारकों को कम करने के लिए असरदार रणनीति और नीतियाँ तैयार करें.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अन्तरराष्ट्रीय कान देखभाल दिवस के अवसर पर ये संदेश जारी किया है.

ये दिवस तीन मार्च को मनाया गया. दुनिया भर में क़रीब 36 करोड़ ऐसे लोग हैं जिन्हें ठीक तरह से सुनाई नहीं देता.

ये संख्या पूरी दुनिया की आबादी का लगभग पाँच फ़ीसदी हिस्सा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की अन्धेपन और बहरेपन को रोकने वाली ईकाई की डॉक्टर शैली चड्ढा का कहना है कि सुनने की क्षमता प्रभावित होने वाले इन 36 करोड़ में से भी आधे लोगों के मामले ऐसे हैं जिन्हें इस नुक़सान से आसानी से बचाया जा सकता है.

शैली चड्ढा का कहना था, "दुनिया भर में बहरेपन के जितने भी मामले दर्ज हैं उनमें से ज़्यादातर के होने की वजह कानों में संक्रमण का होना रहा है. इसके अलावा रूबेला, मेनिन्जाइटिस जैसे संक्रमण की वजह से भी बहरापन हो जाता है."

"माहौल में ज़्यादा शोर होना और कामकाज के स्थानों पर भी ज़्यादा शोर की वजह से बहरापन हो जाता है."

शैली चड्ढा का कहना था कि बहरेपन का एक बहुत बड़ा कारण ये भी है कि बहुत से लोग कुछ ख़ास क़िस्म की ऐसी दवाइयाँ ज़रूरत से ज़्यादा खातें हैं जिनका असर कानों की क्षमता पर पड़ता है. इसके पुख़्ता सबूत हैं और ये एक बहुत गम्भीर समस्या है.

बहुत कम और मध्यम आय वाले देशों में अक्सर बहरेपन की समस्या काफ़ी बड़ी संख्या में और गम्भीर रूप में पाई जाती है.

शायद ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन देशों में लोगों के कानों में संक्रमण ज़्यादा होता है जिसका सही समय पर इलाज नहीं हो पाता है.

जबकि विकसित देशों में कान के संक्रमण का सही समय पर इलाज हो जाता है जिससे इस चुनौती का सही तरीक़े से सामना कर लिया जाता है. दुनिया भर में 65 वर्ष से ज़्यादा उम्र के लगभग 30 फ़ीसदी लोगों में बहरेपन की समस्या देखी जाती है.

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