28/02/2014

यूक्रेन में अत्यधिक बल प्रयोग हुआ

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“यूक्रेन सरकार ने देश के क़ानून और संविधान का उल्लंघन करते हुए अपने ही देश के लोगों के ख़िलाफ़ ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग किया है.”

ये कहना है संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन के स्थाई प्रतिनिधि यानी राजदूत यूरीय सर्गेयेफ़ का, जिन्होंने देश की राजनीतिक स्थिति के बारे में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में ये बयान दिया.

राजदूत सर्गेयेफ़ ने इस बारे में विस्तार से बातचीत करते हुए कहा कि पहली बार अपने ही देश के नागरिकों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग की घटनाएँ 30 नवंबर से एक दिसम्बर 2013 को हुई थीं जब दंगा विरोधी पुलिस ने राजधानी किएफ़ में प्रदर्शनकारी छात्रों की निर्मम और बर्बर तरीक़े से पिटाई की थी.

राजदूत यूरीय सर्गेयेफ़ ने कहा, “दंगा विरोधी पुलिस द्वारा उन छात्रों की पिटाई किए जाने के बाद छात्रों के समर्थन में पूरा देश एकजुट हो गया था. इसके बावजूद अधिकारियों ने अपनी अन्तरआत्मा की भी आवाज़ नहीं सुनी और ना ही अन्य देशों और संयुक्त राष्ट्र की पुकार पर ही कोई ध्यान दिया. इन अपीलों में समस्या का कोई शान्तिपूर्ण हल निकालने की पेशकश की गई थी. सरकार ने प्रदर्शनकारियों का दमन जारी रखा.”

“लेकिन सरकार विरोध में लोगों की भागीदारी बढ़ती गई जिसकी परिणति ख़ूनख़राबे के रूप में हुई. अनेक लोगों को अपनी जान से वंचित होना पड़ा. ये राजनीतिक महत्वकांक्षाओं का ख़ामियाज़ा है.”

राजदूत यूरीय सर्गेयेफ़ ने कहा कि सरकार और विपक्ष के बीच 21 फ़रवरी को समझौता सिर्फ़ अन्तरराष्ट्रीय प्रयासों से सम्भव हो सका है.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी यूक्रेन के नागरिकों का आहवान किया है कि वो हिंसा का रास्ता ना अपनाएँ और अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए शान्तूपूर्ण तरीक़ों और बातचीत का सहारा लें.

महासचिव बान की मून ने यूक्रेन के लोगों को संयुक्त राष्ट्र के समर्थन का भरोसा दिलाने के लिए अपने विशेष सलाहकार रॉबर्ट सैरी को यूक्रेन भेजा था.

महासचिव ने यूक्रेन में ऐसी राजनैतिक और सुलह-सफ़ाई की प्रक्रिया शुरू करने का आहवान किया है जिसमें देश की एकता और क्षेत्रीय अखंडता को कोई आँच ना आए और देश के लोगों की जायज़ इच्छाओं को भी पर्याप्त स्थान और अहमियत मिल सके.

ग़ौरतलब है कि 18 फ़रवरी को राजधानी किएफ़ में हुई हिंसा में 22 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई.

यूक्रेन को यूरोपीय संघ के ज़्यादा नज़दीक ले जाने की माँग को लेकर पिछले वर्ष नवम्बर में प्रदर्शन शुरू हुए थे.

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