21/02/2014

क़ानून का शासन संगठन की धुरी है

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि ये विश्व संगठन जो भी काम करता है, क़ानून का शासन उस कामकाज की धुरी है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को एक विचार गोष्ठि का आयोजन किया था जिसका विषय था – अन्तरराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा क़ायम रखने के प्रयासों के दौरान क़ानून का शासन मज़बूत और सुनिश्चित करने को प्रोत्साहन देना.

महासचिव बान की मून ने इस विचार गोष्ठि में कहा कि तमाम देशों में क़ानून के शासन को मज़बूत करना संयुक्त राष्ट्र के तमाम शान्ति अभियानों और राजनैतिक मिशनों का अटूट हिस्सा है.

उन्होंने कहा कि दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र के 18 मिशन चल रहे हैं जिन्हें क़ानून का शासन मज़बूत करने की ताक़ीद और समर्थन हासिल है.

बान की मून का कहना था, “संयुक्त राष्ट्र में हम जो भी काम करते हैं, क़ानून का शासन उसकी धुरी है. क़ानून का शासन शान्ति और सुरक्षा से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है. जब किसी भी देश में सार्वजनिक संस्थाएँ आम लोगों के अधिकारों की हिफ़ाज़त करने और उन्हें न्याय दिलाने में नाकाम हो जाती हैं तो असुरक्षा और हिंसा जगह अपनी जगह बना लेती है.”

“किसी भी देश में सुलह-सफ़ाई और टिकाऊ शान्ति स्थापित करने के लिए ज़रूरी है कि क़ानून का शासन मज़बूत हो. इसके लिए ऐसी संस्थाएँ क़ायम किया जाना बेहद ज़रूरी है जो लोगों की पुकार को सुनकर न्याय और क़ानून की हिफ़ाज़त करने में सक्षम हों.”

महासचिव बान की मू ने ये भी कहा कि लोगों में ये भरोसा बहाल करना बेहद ज़रूरी है कि उनके देश की संस्थाएँ विवादों को बिना देर किए और निष्पक्ष रूप से हल करने में सक्षम हैं. ये भरोसा किसी भी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए बहुत अहम है.

उन्होंने कहा कि साथ ही लोगों को बुनियादी सेवाओं के साथ-साथ न्याय और सुरक्षा मुहैया कराना भी बहुत ज़रूरी है.