14/02/2014

अफ़ग़ानिस्तान में 2013 रहा ख़ूनी वर्ष

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अफ़ग़ानिस्तान में अनेक वर्षों से जारी हिंसा और अस्थिरता की वजह से वर्ष 2013 बच्चों और महिलाओं के लिए सबसे ज़्यादा रक्तरंजित रहा.

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन ने वार्षिक रिपोर्ट में बताया है कि वर्ष 2009 के बाद वर्ष 2013 में सबसे ज़्यादा बच्चे और महिलाएँ हताहत हुए यानी वो या तो मारे गए या घायल हो गए.

रिपोर्ट बताती है कि अफ़ग़ानिस्तान में पिछले वर्षों के मुक़ाबले वर्ष 2013 में आम लोगों की मौत और घायल होने की घटनाओं में 14 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई.

वर्ष 2012 के मुक़ाबले सात प्रतिशत वृद्धि मौतों और 17 प्रतिशत वृद्धि घायल होने की घटनाओं में हुई. आम लोगों को निशाना बनाने में सबसे ज़्यादा नुक़सान Improvised Explosive Devices (IED) यानी संवर्धित विस्फोटक बम ने किया.

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में मानवाधिकार मामलों की निदेशक जॉर्जेट गैगनॉन का कहना था कि वर्ष 2009 के मुक़ाबले वर्ष 2013 में बच्चों और महिलाओं की सबसे ज़्यादा जानें गईं.

महिलाओं के हताहत होने की घटनाओं में 36 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई और बच्चों के हताहत होने के मामले 34 प्रतिशत बढ़े.

बच्चों और महिलाओं की ज़्यादातर मौतें आई ई डी की वजह से हुई.

उन्होंने बताया कि आई ई डी का इस्तेमाल सड़कों, पार्कों, साइकिलों और आत्मघाती हमलों में किया गया.

इसलिए वर्ष 2013 में जितने लोग हताहत हुए उनमें से लगभग आधे सिर्फ़ आई ई डी की वजह से ही हताहत हुए.

जॉर्जेट गैगनॉन का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में वर्ष 2013 में इसलिए भी बड़ी संख्या में लोग मारे गए क्योंकि देश भर में सरकारी कर्मचारियों, धार्मिक नेताओं, मौलवियों और उन लोगों को निशाना बनाया गया जो सरकार द्वारा शुरू की गई शान्ति प्रक्रिया को समर्थन दे रहे थे.

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