7/02/2014

खेलों में है एकजुटता लाने की ताक़त

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने दुनिया भर के लोगों का आहवान किया है कि ओलम्पिक खेलों की भावना को अपनाएँ जिसमें निष्पक्ष खेल और एक दूसरे का सम्मान किया जाता है.

बान की मून ने रूस के सोची शहर में शीतकालीन ओलम्पिक खेलों के उदघाटन समारोह के दौरान ये बात कही. बान की मून ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्तरराष्ट्रीय ओलम्पिक समिति के अध्यक्ष के साथ इस समारोह में शिरकत की.

इससे पहले इन खेलों की पूर्व संध्या पर बान की मून ने कहा कि कि खेलों की लोकप्रियता साबित करती है कि खेल सीमाओं और बन्धनों को तोड़ने की ताक़त रखते हैं. इतना ही नहीं खेलों में लोगों को एकजुट करके उनमें एकता की भावना मज़बूत करने की भी क्षमता है.

अन्तरराष्ट्रीय ओलम्पिक समिति की आम सभा को पहली बार सम्बोधित करते हुए बान की मून ने दुनिया भर के संघर्षरत गुटों से अनुरोध किया कि वो शीतकालीन ओलम्पिक खेलों के दौरान युद्धविराम समझौता कर लें ताकि शान्ति के लिए रास्ता तैयार हो सके.

बान की मून का कहना था, "ओलम्पिक से नज़र आता है कि खेलों में अलग अलग उम्र, नस्ल, धर्म और वर्गों के लोगों को एक साथ लाने की कितनी बड़ी ताक़त मौजूद है. खेल के मैदान पर अलग-अलग पृष्ठभूमि और पहचान के लोग एक साथ होते हैं. ये युद्ध या लड़ाई का नहीं बल्कि खेल का मैदान होता है. मैंने ऐसे बहुत से मुक़ाम और मौक़े देखे हैं जहाँ देशों को युद्ध, ग़रीबी, प्राकृतिक संकट, मुसीबत या अन्य तरह की समस्याओं के मुद्दे पर एक मंच पर देखा जाता है. आज मैं सोची में एक अलग तरह के मंच से आपको सम्बोधित कर रहा हूँ जहाँ लोगों में दोस्ताना प्रतिस्पर्धा और सदइच्छा की भावना देखी जा रही है."

महासचिव बान की मून के शब्द. उन्होंने कहा कि खेलों में किसी भी तरह की दुर्भावना के लिए 21 वीं सदी में कोई जगह नहीं है.

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