7/02/2014

2013 में रही रिकॉर्ड गर्मी

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आपको ये जानकर शायद हैरानी हो कि जब से मौसम के मिज़ाज का रिकॉर्ड संजोकर रखा जाना शुरू किया गया तबसे वर्ष 2013 ऐसे दस वर्षों में शामिल रहा जो सर्वाधिक गर्म दर्ज किए गए.

विश्व मौसम संगठन यानी WMO का कहना है कि वर्ष 1850 से मौसम की गर्मी का रिकॉर्ड रखना शुरू किया गया था और तब से दस वर्ष ऐसे गुज़र चुके हैं जो सबसे ज़्यादा गर्म रहे.

वर्ष 2013 में पृथ्वी और समुन्दरों की सतह का तापमान 1961 – 1990 की अवधि के औसत तापमान से 0.5 यानी आधा डिग्री सेल्सियस ऊपर रहा.

संगठन का कहना है कि वर्ष 2013 में दुनिया भर का तापमान लम्बी अवधि के गरमी बढ़ाने वाले रुख़ पर रहा. वैसे तो गर्मी बढ़ने की ये दर एक समान नहीं है लेकिन तापमान में बढ़ोत्तरी की प्रक्रिया को नकारा नहीं जा सकता.

विश्व मौसम संगठन के महासचिव माइकल जर्राड का कहना था कि पृथ्वी और समुद्रों की सतहों के तापमान का जलवायु परिवर्तन से सीधा सम्बन्ध है क्योंकि अत्यधिक गर्मी या अत्यधिक ठंड की स्थितियाँ ज़मीन की सतह का तापमान धीरे-धीरे बढ़ने से सीधे तौर पर सम्बन्धित हैं.

माइकल जर्राड का कहना था कि ये साफ़तौर पर नज़र आ रहा है कि पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, हालाँकि इस तापमान बढ़ोत्तरी में एकरूपता नहीं है. कुछ स्थानों पर गर्मी बहुत ज़्यादा देखी जा रही है जिसकी वजह से ख़तरनाक लू चलती है.

वर्ष 2013 में ऑस्ट्रेलिया भी एक ऐसा ही स्थान रहा जहाँ अभी तक की सबसे ज़्यादा गर्मी रिकॉर्ड की गई.

माइकल जर्राड ने कहा कि अगर हमें पृथ्वी के तापमान में औसतन वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस तक ही सीमित रखना है तो तुरन्त ठोस क़दम उठाने होंगे. इनमें ग्रीन हाउस समूह की गैसों का उत्सर्जन ठोस मात्रा में कम करना होगा.

विश्व मौसम संगठन का कहना है कि अभी तक कुल 14 सबसे ज़्यादा गर्म वर्ष दर्ज किए गए हैं जिनमें से 13 वर्ष 21 वीं सदी यानी इसी सदी में गुज़रे हैं.

सबसे ज़्यादा गर्म वर्ष 2010 और 2005 हैं जिस दौरान विश्व का तापमान लम्बी अवधि के औसत से भी 0.55 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा रहा था.