7/02/2014

यमन में मदद की सख़्त ज़रूरत

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यमन में संयुक्त राष्ट्र के दूत इस्माईल शेख़ अहमद ने आगाह किया है कि वहाँ तब तक राजनीतिक स्थिरता नहीं आ सकती जब तक कि लोगों की मानवीय ज़रूरतें पूरी नहीं की जाती हैं जो उनकी ज़िन्दगी बरक़रार रखने के लिए ज़रूरी है.

ग़ौरतलब है कि यमन में हाल के वर्षों के दौरान हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता की वजह से हालात बहुत ख़राब रहे हैं जिसकी वजह से वहाँ भारी असुरक्षा के हालात बन गए हैं और विकास ठप हो गया है.

यमन की आबादी लगभग ढाई करोड़ है जिसमें से लगभग आधी आबादी को मानवीय सहायता की तुरन्त ज़रूरत है, यहाँ तक कि लोगों के पास खाने-पीने का सामान भी नहीं मिल पा रहा है.

यमन विश्व का ऐसा दूसरा देश है जहाँ सबसे ज़्यादा कुपोषण पाया जाता है यानी लोगों को स्वस्थ रहने के लिए ज़रूरी भोजन भी नहीं मिल पा रहा है.

यमन में पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की लगभग आधी आबादी का विकास रुक गया है.

यमन में संयुक्त राष्ट्र दूत इस्माईल शेख़ अहमद का कहना था कि राजनीतिक स्थिरता होगी तभी विकास हो सकता है नहीं तो हालात को सही नहीं किया जा सकता.

इस्माईल शेख़ अहमद का कहना था  कि यमन में तब तक स्थिरता और बेहतर हालात की उम्मीद कैसे की जा सकती है जब देश की लगभग आधी आबादी सुबह उठती है तो उसे ये भरोसा नहीं होता कि भरपेट भोजन मिल भी पाएगा या नहीं. ये आधी आबादी ग़रीबी रेखा से नीचे गुज़र बसर करने को मजबूर है.

उन्होंने कहा कि इसका मतलब ये भी निकलता है कि देश में राजनीतिक चुनाव नहीं कराए जा सकते और कोई भी राजनीतिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती क्योंकि अगर जीने के लिए लोगों की मानवीय ज़रूरतें ही पूरी नहीं होंगी तो उन्हें किसी भी तरह की राजनीतिक प्रक्रिया में कोई दिलचस्पी नहीं होगी.

संयुक्त राष्ट्र ने यमन में विकास गतिविधियाँ चलाने और मानवीय सहायता मुहैया कराने के लिए इस वर्ष यानी 2014 के लिए लगभग साठ करोड़ डॉलर की सहायता की अपील की है.

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